हिमाचल में सेब बागवानों को बड़ी राहत, 100 बोरी खरीद पर नहीं देने होंगे राजस्व दस्तावेज

    10-Jan-2026
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नई दिल्ली।हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसान-बागवान संगठन संयुक्त किसान मंच की मांग पर प्रदेश सरकार ने छोटे बागवानों को बड़ी राहत दी है। मार्केट इंटरवेंशन स्कीम में सेब बेचने वाले ऐसे बागवान, जिन्होंने सौ बोरी से कम सेब बेचा था, उनसे अब राजस्व रिकॉर्ड यानी खतौनी, जमाबंदी या अन्य भूमि दस्तावेज नहीं लिए जाएंगे। सरकार के निर्देशों के बाद हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम ने इस संबंध में बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी है।

केवल फ्रूट रसीद के आधार पर भुगतान किया जाएगा

एचपीएमसी की ओर से कहा है कि या गया है कि एमआईएस सीजन 2025 के दौरान निगम के खरीद केंद्रों पर सौ से कम सेब की बोरियां लाने वाले किसानों को केवल फ्रूट रसीद के आधार पर भुगतान किया जाएगा। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार के राजस्व दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा।

क्या है MIS

मंडी मध्यस्थता योजना में सेब का मतलब हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में सरकार द्वारा किसानों से उनके कम गुणवत्ता वाले सेबों को एक निश्चित न्यूनतम मूल्य पर खरीदना है, ताकि बाज़ार में उचित दाम न मिलने पर किसानों को आर्थिक मदद मिल सके और उनके हितों की रक्षा हो सके, जिसमें एचपीएमसी जैसी संस्थाएं सेब खरीदकर उन्हें जूस, जैम आदि में प्रोसेस करके बाजार में उतारती हैं।