
नई दिल्ली।हिमाचल प्रदेश के सेब और अन्य गुठलीदार फलों की खेती इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है।प्रदेश के प्रमुख फल उत्पादक क्षेत्रों में इस बार सर्दियां बेहद सूखी साबित हो रही हैं। लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण भूमि में नमी लगभग समाप्त हो चुकी है, जिसका सीधा असर बागवानी पर पड़ रहा है।
सर्दियों में फल पौधों को जरूरी चिलिंग ऑवर्स
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में फल पौधों को जरूरी चिलिंग ऑवर्स नहीं मिल पा रहे हैं। चिलिंग ऑवर्स की कमी से पौधों में फ्लावरिंग और फ्रूट सेट की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे आने वाली फसल पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
बारिश की उम्मीद में किसान
किसान और बागवान लगातार मौसम के बदलने और बारिश होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। गांव कलना, पंचायत शिगला की किसान लता का कहना है कि काफी समय से बारिश नहीं हुई है, जिससे बोई गई फसलें प्रभावित हो रही हैं. सूखे के कारण पौधों में बीमारियां बढ़ रही हैं और नए पौधे भी नहीं लगाए जा पा रहे हैं. उन्होंने सरकार से किसानों की मदद करने की मांग की है। बागवानी के जानकार बताते है कि यदि पौधों की जड़ों तक नमी नहीं पहुंचेगी तो पौधे मजबूत नहीं बनेंगे। इसका सीधा असर फ्लावरिंग पर पड़ेगा और फसल टूटने की आशंका बढ़ जाएगी।