करें अश्वगंधा की बागवानी होगी बेहतर कमाई

    18-Jan-2026
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नई दिल्ली।आज के बदलते दौर में अब खेती सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि मोटी कमाई का बिजनेस बनती जा रही है। पारंपरिक फसलों के बजाय अब फल, फूल और औषधीय खेती का बोलबाला है। इसी कड़ी में अश्वगंधा एक ऐसी फसल बनकर उभरी है जिसने किसानों की तकदीर बदल दी है। जब से खास किस्म की इस अश्वगंधा को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई (GI) टैग मिला है, तब से इसकी मांग सातवें आसमान पर पहुंच गई है।

GI टैग का जादू

जीआई टैग  मिलना किसी भी फसल के लिए सम्मान पदक जैसा होता है। इस खास टैग के मिलने के बाद अब इस क्षेत्र की अश्वगंधा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। इसका मतलब है कि अब इस नाम से कोई और अपनी फसल नहीं बेच पाएगा।

कम खर्च, कम पानी और कीटों का झंझट भी खत्म

अश्वगंधा की खेती की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सादगी है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यह फसल शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए वरदान है। इसमें कीटों और बीमारियों का हमला बहुत कम होता है, जिससे किसानों का कीटनाशकों पर होने वाला भारी खर्च बच जाता है।