सर्दी में कश्मीर में बर्फबारी नहीं, सेब बागवानों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

    21-Jan-2026
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नई दिल्ली। कश्मीर घाटी में सर्दियों का मौसम हमेशा से सेब की खेती के लिए सबसे अहम माना जाता रहा है। बर्फ से ढकी वादियां, लंबे समय तक ठंड और धीरे-धीरे पिघलती बर्फ, यही वह प्राकृतिक चक्र है, जिस पर कश्मीर का सेब उत्पादन टिका होता है। लेकिन इस साल सर्दी कुछ अलग ही रंग दिखा रही है. लंबे समय से बर्फबारी नहीं हुई है, तापमान सामान्य से ज्यादा बना हुआ है और इसी वजह से सेब बागानों में एक अजीब सी बेचैनी फैल गई है।

बर्फ नहीं गिरी, मौसम ने बदला मिजाज

ग्रेटर कश्मीर की रिपोर्ट के अमुसार, उत्तर और दक्षिण कश्मीर के सेब उत्पादक इलाकों में किसान कहते हैं कि उन्होंने ऐसी सर्दी पहले कभी नहीं देखी। आमतौर पर दिसंबर और जनवरी में अच्छी बर्फबारी हो जाती है, जिससे बागानों में पेड़ गहरी नींद यानी सुप्त अवस्था में चले जाते हैं।

सेब के पेड़ों को खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक, सेब के पेड़ों को सर्दियों में एक तय समय तक ठंड चाहिए होती है, जिसे चिलिंग आवर्सकहा जाता है। यही ठंड बाद में एकसमान फूल और अच्छे फल बनने में मदद करती है। अगर यह संतुलन बिगड़ता है, तो पेड़ समय से पहले कली निकाल सकते हैं।

बागानों में दिखने लगे असर

शोपियां, बारामुला, अनंतनाग, पुलवामा और कुलगाम जैसे सेब उत्पादक जिलों के किसान बताते हैं कि मौसम का असर अब दिखने लगा है। शोपियां के बागवान तारिक अहमद मीर कहते हैं कि आमतौर पर मार्च तक बागान शांत रहते हैं, लेकिन इस बार मौसम जल्दी बदल रहा है।