
जयपुर।राजस्थान के पुष्कर शहर नर्सरी के हब तौर पर जाने जाने लगा है। जब यहां केवल जामुन, शहतूत जैसे कुछ फल और फूलों के पौधे तैयार करने तक ही यहां की नर्सरी सीमित थी। लेकिन आज के बदलते दौर में पुष्कर में सवा सौ से भी अधिक नर्सरियां संचालित हैं। पुष्कर की नर्सरी में देश के कोने-कोने में मिलने वाले फल और फूलों के पौधे उपलब्ध हैं।
ठंडे जलवायु वाले पौधे भी मौजूद
विगत एक दशक से पुष्कर में नर्सरीयों में शानदार प्रगति हुई है। खेती छोड़कर यहां कई किसान अब बेहतर कमाई के लिए नर्सरी तैयार कर रहे हैं। इनमें कई किसान ऐसे हैं जिन्होंने 1992 से नर्सरी के कारोबार में कदम रखा और आज नर्सरी कारोबार से सालाना करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। यहां आम,अनार,आंवला, जामुन, फालसेसमेत फलों, फूलों और सब्जियों की खेती की जाती है।
देश-विदेश के पौधे है मौजूद
पुष्कर में लगभग सवा सौ से अधिक नर्सरियां हैं। पुष्कर का वातावरण और यहां की मिट्टी में खासियत है कि यहां नर्सरी उद्योग विकसित हो गया है। यहां लीची, सेब, आड़ू, आलू बुखारा, अंजीर, नाशपाती, बादाम, पिस्ता, अंगूर, कटहल तक के पौधे मिल जाते हैं।