वैज्ञानिक ढंग से करें बगीचों की देखभाल पौधों में होगा सुधार

    25-Jan-2026
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शिमला। बारिश और बर्फबारी के बाद बगीचों में नमी बढ़ गई है। इस समय वैज्ञानिक ढंग से की गई देखभाल से पौधों की जड़ों की सेहत में सुधार होता है और आने वाली फसल मजबूत बनती है।हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग के निदेशक विनय सिंह ने बागवानों से आग्रह किया कि वह तने के चारों ओर तौलिया बनाएं। इसकी तने से कम से कम एक फीट की दूरी तक खोदाई न करें ताकि पानी के रिसाव अथवा घाव के कारण मुख्य जड़ें क्षतिग्रस्त न हों।

प्रति पौधा लगभग 10 किलो सड़ी हुई गोबरडाले

निदेशक उद्यान ने बताया कि प्रति पौधा लगभग 10 किलो सड़ी हुई गोबर खाद या 5 किलो केंचुआ खाद तने से दूर समान रूप से फैलाकर मिट्टी में दबानी चाहिए। यदि मिट्टी जांच रिपोर्ट में सिंगल सुपर फास्फेट की सिफारिश की गई हो तो ऐसी स्थिति में तने से लगभग 1.5 फीट दूर गोल नाली बनाकर खाद डालें और मिट्टी से ढक दें। उन्होंने कहा कि यदि मिट्टी जांच में पोटाश की आवश्यकता दर्शाई गई हो तो 5000 से 7000 फीट ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तने से 1.5 फीट दूर पोटाश को फैलाकर मिट्टी में मिलाएं।

बारिश और बर्फबारी से जगी आस

बारिश और बर्फबारी के बाद नया बगीचा लगाने के लिए सबसे पहले खेत का सही रेखांकन करना आवश्यक है। रूट स्टॉक के अनुसार दूरी रखते हुए एमएम 111, एम 7 और एमएम 106 में पौधे से पौधे की दूरी 2 मीटर और कतार से कतार की दूरी 3 मीटर रखें। एम 9 रूट स्टॉक के लिए पौधे से पौधे की दूरी एक मीटर और कतार से कतार की दूरी 3 मीटर उपयुक्त रहती है।