
रांची।आज के बदलते समय में किसान कृषि बागवानी कर बेहतर कमाई कर रहे है। अब किसान और बागवान परंपरागत फसलों के साथ-साथ ऐसी खेती की ओर भी रुख कर रहे हैं। जिससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक फायदा हो, बल्कि खेत और बगीचों की खूबसूरती भी बढ़े। झारखंड के किसान अब गुड़हर के फूल की खेती कर रहे है। इसकी खासियत यह है कि यह सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भरपूर है और आयुर्वेदिक दवाओं से लेकर घरेलू नुस्खों तक में इसका इस्तेमाल होता है।
झारखंड में गुड़हल की खेती किसानों को बेहतर कमाई
झारखंड में गुड़हल की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनी है। फूलों से बनने वाली हर्बल चाय और पाउडर की बढ़ती लोकप्रियता ने उन्हें स्थायी बाज़ार, ऊँचे दाम और भरोसेमंद आय का अवसर दिया। गुड़हल के फूलों से बनी लाल रंग की हर्बल चाय एक पौष्टिक और कैलोरी-मुक्त पेय है, जो कोलेस्ट्रॉल कम करने, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने, वजन घटाने और पाचन में सुधार करने के लिए जानी जाती है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। पानी में गुड़हल की पंखुड़ियां 2-3 मिनट तक उबाल कर और छानकर इसमें स्वादानुसार नींबू का रस, शहद या अदरक मिलाकर पीया जाता है। फूलों को रात भर पानी में भिगोकर भी इसकी चाय बनाई जा सकती है, जो ताजगी प्रदान करती है। इसी की वजह से झारखंड के किसान गुड़हर की खेती से बेहतर कमाई कर रहे है।