
पटना।बिहार लीची की खेती के लिए जाना जाता है। पूरे देश में लगभग 92 हजार हेक्टेयर में लीची उगाई जाती है। बिहार के मुजफ्फरपुर के आस-पास के जीलों में लीची की खेती की जाती है। इस फल की बागवानी से बागवानों को बेहतर कमाई होती है।
जनवरी और फरवरी लीची की खेती के लिए अहम
लीची की बागवानी करने वाले किसानों को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के पादप रोग विज्ञान विभाग के हेड डॉ. एस. के. सिंह ने सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि जनवरी के अंत से फरवरी का महीना लीची के लिए सबसे 'संवेदनशील' होता है। जनवरी और फरवरी के महीने में ही पेड में मंजर यानी फूल आता है। इस समय की गई एक छोटी सी गलती पूरे साल की मेहनत पर पानी फेर सकती है।
बौर आने से पहले करें यह काम
आम के पेड़ में बौर आने से पहले बाग की हल्की गुड़ाई और साफ-सफाई करें ताकि खरपतवार खत्म हो जाएं। लेकिन ध्यान रहे कि गुड़ाई गहरी न हो वरना जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। अगर बाग में एरिनोज माइट से प्रभावित टहनियां दिखें, तो उसे काटकर हटा दें। मंजर आने से पहले सिंचाई बिल्कुल बंद कर देनी चाहिए।