
नई दिल्ली।दिसंबर-जनवरी का मौसम आमतौर पर किसानों के लिए रबी फसलों की देखरेख का समय माना जाता है। सर्दियों में तापमान अनुकूल रहने, मिट्टी में नमी बने रहने और सिंचाई की जरूरत कम होने के कारण फलदार पौधों का रोपण बेहद सफल रहता है। खेत की मेढ़, बगिया, घर के आसपास की खाली ज़मीन या अनुपयोगी पड़ी जगह पर यदि सही किस्म के फलदार पौधे लगाए जाएं तो बिना मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाए किसान अपनी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं। यही कारण है कि अब परंपरागत खेती के साथ-साथ मेढ़ आधारित फल उत्पादन की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
जनवरी में फलदार पौधों की रोपाई
बागवानी के जानकारों की माने तो सर्दियों में रोपण किए गए पौधों की जड़ें तेजी से जमती हैं जिससे उनकी शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है। इस मौसम में कीटों और रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है। जिससे पानी और श्रम दोनों की बचत होती है। यही वजह है कि कम लागत में बेहतर परिणाम पाने के लिए दिसंबर-जनवरी को आदर्श समय माना जाता है।
उपयुक्त 5 फलदार पौधे
अमरूद, नींबू, पपीता, केला और आंवला ऐसे फलदार पौधे हैं जिन्हें खेत की मेढ़ या बगिया में आसानी से लगाया जा सकता है। अमरूद और नींबू को 6-8 घंटे की सीधी धूप और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी की जरूरत होती है। पपीता और केला कम समय में फल देने वाली फसलें हैं जिससे किसानों को जल्दी नकद आय मिलने लगती है। वहीं आंवला दीर्घकालीन निवेश है जो वर्षों तक लगातार उत्पादन देकर स्थायी मुनाफ़ा देता है।