
नई दिल्ली।उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की रहने वाली केदारी राणा ने अपने संघर्ष से सफलता प्राप्त की है। उन्होंने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कर्ज लेकर अपने खेतों में सेब का बाग तैयार करने का निर्णय लिया। केदारी ने अपने सपनों को सच करने के लिए समूह से दो किस्तों में कुल 1 लाख रुपये का लोन लिया इस पैसे से उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि अपने खेत में 'स्पर्श' किस्म के 1200 सेब के पौधे लगाए। यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जब धीरे-धीरे उनकी बंजर उम्मीदें हरे-भरे पेड़ों में बदलने लगीं।
लखपति दीदी के तौर पर जानी जाती है
केदारी की मेहनत का फल उनके बागानों में साफ दिखाई देता है। आज उनके बागान से हर साल लगभग 300 पेटी सेब की पैदावार होती है। इससे उन्हें बेहतर मुनाफा हो रही है। आज वे एख लखपति दीदी के रूप में जानी जाती है।
30 समूहों को दी नई जिंदगी
केदारी राणा को समूह से मिलने वाले आत्मविश्वास ने उन्हें एक समाज सुधारक के रूप में भी उभारा है। उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को संगठित किया और अब तक 30 नए स्वयं सहायता समूहों के गठन में अहम भूमिका निभाई है। वह अपनी जैसी अन्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मुश्किलें हारीं, केदारी जीतीं
आज केदारी एक 'कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में काम कर रही हैं। वे अपनी सफलता की कहानी और तकनीकी ज्ञान को दूसरी महिलाओं के साथ साझा करती हैं। वे उन्हें सिखाती हैं कि कैसे सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर गरीबी को मात दी जा सकती है।