
नई दिल्ली। जम्मू और कश्मीर में बारिश की कमी के कारण बागवानी करने वाले बागवानों की चिंता बढ़ने लगी है। आधिकारिक डेटा के मुताबिक घाटी के बड़े हिस्सों में इस सर्दियों के मौसम में बारिश में काफी कमी दर्ज की गई इससे आने वाले महीनों में मिट्टी की नमी, पानी की उपलब्धता और फसल की ग्रोथ पर असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पहले की अपेक्षा कम बारिश
श्रीनगर के मौसम विभाग के डेटा से पता चलता है कि पूरे जम्मू और कश्मीर में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच 77.5 एमएम ही बारिश हुई है।यह सामान्य से करीब 39 फीसदी कम है। घाटी में सामान्य स्थितियों में 127.7 एमएम बारिश सर्दियों के मौसम में दर्ज होती है।
कहा कितनी हुई बारिश
कई जिलों में बारिश में 50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी देखी गई। श्रीनगर में 53.8 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह नॉर्मल से करीब 51 प्रतिशत कम है। जबकि शोपियां और कुलगाम में क्रमशः 78 और 65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। उत्तर कश्मीर जिलों में भी बारिश में भारी गिरावट देखी गई। बारामूला में 56.2 एमएम बारिश हुई, जो 58 प्रतिशत कम है।
बारिश ने होने से सेब की फसल को नुकसान
बारिश की कमी से सेब की फसल को पानी की कमी, पोषक तत्वों के अवशोषण में कमी, कीटों और बीमारियों का बढ़ना, और चिलिंग घंटों की कमी जैसे नुकसान होते हैं, जिससे फलों का आकार छोटा होता है, वे ठीक से विकसित नहीं हो पाते, गुणवत्ता घटती है, और अंततः उत्पादन और आय में भारी कमी आती है, जैसा कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के बागवानों ने अनुभव किया है।