
नई दिल्ली।अगर आपको औषधीय फसलों की खेती करनी है। क्योंकि कई ऐसी औषधीय फसलें हैं, जिनकी खेती खारे पानी में भी की जा सकती है। इन्हीं फसलों में एक है अश्वगंधा। अगर आप अश्वगंधा की खेती करते हैं, तो कम लागत में तगड़ी कमाई होगी, क्योंकि मार्केट में इसकी डिमांड अधिक है। इससे कई सारी आयुर्वेदिक दवाइयां भी बनाई जाती हैं।
अश्वगंधा औषधीय गुणों से भरपूर
अश्वगंधा औषधीय गुणों से भरपूर फसल है। यह कम सिंचाई में आसानी से तैयार हो जाती है। बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। खास बात यह है कि अश्वगंधा सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए बेहद उपयुक्त नकदी फसल है। अगर किसान इसकी खेती करते हैं, तो कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
इतने दिनों में तैयार हो जाती है
अश्वगंधा सूखे और अर्द्ध‑शुष्क इलाकों में अच्छी तरह उगती है और इसके लिए हल्की दोमट या रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है, जहां पानी का जमाव न हो। यह फसल 20°C से 35°C तापमान और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बेहतर बढ़ती है। अश्वगंधा की खेती खारे पानी में भी की जा सकती है और जैविक खाद व वर्मी कम्पोस्ट देने से मिट्टी की उर्वरता और फसल की गुणवत्ता बढ़ती है।
बुवाई से पहले तैयार करें खेत
अश्वगंधा की खेती के लिए खेत की अच्छी तैयारी बहुत जरूरी है। सबसे पहले ट्रैक्टर से गहरी जुताई कर खेत को भुरभुरा बनाएं और उसमें खाद मिलाएं। इसके बाद बीज का उपचार करके बुवाई करें। एक हेक्टेयर में लगभग 7- 8 किलो बीज पर्याप्त होते हैं।