नई दिल्ली।सरकार फरवरी में होने वाले बजट सत्र के पहले चरण में Seeds Bill 2025 को संसद में पेश करने की तैयारी में है। कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि इस बिल को लेकर करीब 9,000 सुझाव और आपत्तियां मिली हैं, जिनकी जांच के बाद कैबिनेट नोट तैयार किया जाएगा। यह प्रस्तावित कानून 1966 के Seeds Act की जगह लेगा, जिसे मौजूदा समय की जरूरतों के हिसाब से पुराना माना जा रहा है. सरकार का दावा है कि नया कानून बीजों की गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और जवाबदेही को मजबूत करेगा।
Seeds Bill 2025 में क्या बड़े बदलाव हैं?
नए बीज कानून के तहत बीज की किस्मों, बीज उत्पादकों और बीज विक्रेताओं का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा। बीज पैकेट पर QR कोड जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिससे किसान बीज की जानकारी आसानी से जांच सकेंगे।
विरोध में क्यों किसान संगठन?
एक ओर जहां सरकार का कहना है कि Seeds Bill 2025 बीजों की गुणवत्ता सुधारने, नकली बीज पर रोक लगाने और किसानों को बेहतर जानकारी देने के लिए लाया जा रहा है। रजिस्ट्रेशन और QR कोड जैसे प्रावधानों को सरकार पारदर्शिता से जोड़कर देख रही है।वहीं, किसान संगठनों को आशंका है कि यही नियम आगे चलकर किसानों की बीज प्रणाली पर कंपनियों की पकड़ मजबूत करेंगे।
INA के प्रतिनिधिमंडल ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री से किया था मुलाकात
बीज विधेयक 2025 को लेकर इंडियन नर्सरीमेन एसोसिएशन(INA) किसानों की भलाई के संदर्भ में आ रहे बीज विधेयक 2025 की सराहना की है। साथ ही इंडियन नर्सरीमेन एसोसिएशन ने कुछ सुझाव भी दिए है। एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि विधेयक से सजावटी पौधों की नर्सरी को बाहर रखा जाए। भले सब्जी और फलों से जुड़ी नर्सरी को विधेयक में शामिल रखे, क्योंकि यह सीधे तौर पर किसानों से जुड़ी है। कुछ दिन पहले ही इंडियन नर्सरीमेन एसोशियसन के अध्यक्ष वाई.पी. सिंह की अगुवाई में नर्सरीमेन एसोशियसन की एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से मुलाकात कर नर्सरी से जुडे किसानों का पक्ष रखा था। साथ ही सलाह भी दिया था यदी सजावटी पौधों की नर्सरी को विधेयक से बाहर नहीं किया गया, तो देशभर में छोटी और अनऑर्गनाइज नर्सरियां बंद हो जाएगी। अकेले दिल्ली एनसीआर में 2000 से ज्यादा नर्सरी है।