
नई दिल्ली।हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर के कृषि विज्ञान केंद्र किन्नौर ने क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण स्टेशन शारबो के सहयोग से छोटा कंबा पंचायत के गरशू गांव में एक दिवसीय जागरूकता शिविर लगाया। इस दौरान वैज्ञानिक तरीके से सेब के पेड़ों की काट-छांट न हो तो सेब की गुणवत्ता प्रभावित होती है। फल वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार ने गरशू गांव में बागवानों को प्रूनिंग के तरीके बताए। इस दौरान उन्होंने सेब और अन्य शीतोष्ण फलों की वैज्ञानिक ट्रेनिंग और काट-छांट का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
सेब के पेड़ों को सही ढंग से परिपक्व होने दें
इस शिविर में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्ग ग्रामीणों ने भाग लिया। फल वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि क्षेत्र में अधिकांश काट-छांट वैज्ञानिक तरीके से नहीं होती, जिससे उपज और गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी कि पहले सेब के पेड़ों को सही ढंग से परिपक्व होने दें। इसके बाद पेड़ों की छांट करें।
अन्य फलों के पेड़ो कैसे बचाएं
इस शिविर में सेब, खुमानी, अखरोट और बेहमी के पेड़ों पर लाइकेन एवं मिस्टलेटो की समस्या पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने कहा कि किड़े उपेक्षित और अधिक नमी वाले वातावरण में पनपते हैं। धीरे-धीरे पेड़ों को कमजोर कर मार देते हैं।