
शिमला।हिमाचल प्रदेश में सेब बागवान बौने पौधे उगाकर अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपियन यूनियन के सेब को चुनौती दे रहे हैं। इन देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से कम कर 20 से 25 फीसदी तक हो गया है। ऐसे में पुरानी किस्मों की मांग घटने की आशंका से कई युवा बागवानों ने कमर कस ली है। वे एक बीघा में कम से कम 350 बौने पौधे उगा रहे हैं। एक पौधा 20 किलो के कार्टन की उपज दे सकता है। बड़े आकार के पौधे एक बीघा में 40 से 50 ही उगाए जा सकते हैं।
नया प्रयोग कर रहे है बागवान
प्रदेश की राजधानी शिमला से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर है जिला शिमला की ठियोग तहसील की ग्राम पंचायत क्यार का जई गांव। यह गांव मशहूर पराला मंडी से भी महज छह किलोमीटर की दूरी पर है। जई निवासी सुनील शर्मा आशंकित हैं कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के सेब पर आयात शुल्क घटाने के बाद उनकी फसल को अच्छे रेट नहीं मिल पाएंगे, इसलिए वे विदेशों की तर्ज पर बौने पौधों वाली उच्च तकनीक से सेब की फसल उगाने के नए प्रयोग कर रहे हैं।
बौने पौधों को उगाने में कश्मीर हिमाचल सबसे आगे
इटली से बौने पौधे मगाने वाले कुनाल चौहान के अनुसार इन पौधों को उगाने में कश्मीर हिमाचल से आगे है, क्योंकि वहां की जमीन सीधी होने पर इन्हें लगाना ज्यादा आसान है। वहां सरकार बागवानों को अच्छा उपदान भी दे रही है। कमाह निवासी कुलदीप कांत शर्मा ने भी रूट स्टॉक पर 1800 पौधे लगा लिए हैं। वह एम 9 के अलावा एमएम 111, एमएम 106 जैसे रूट स्टॉक को कारगर मानते हैं।