
देहरादून। फूलदेई त्यौहार 2026 इस वर्ष 14 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। यह उत्तराखंड का एक अत्यंत सुंदर, भावनात्मक और प्रकृति-आधारित लोक पर्व है, जिसे मुख्यतः छोटे–छोटे बच्चे मनाते हैं। इसी कारण इसे लोक बाल पर्व भी कहा जाता है।फूलदेई केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार, नववर्ष का स्वागत और सामूहिक मंगलकामना की जीवंत परंपरा है। पहाड़ों की संस्कृति में जहाँ हर मौसम का अपना उत्सव है, वहीं फूलदेई बसंत ऋतु के आगमन का संदेश लेकर आता है। फूलदेई मुख्य रुप से उत्तराखंड कुमाऊँ, गढ़वाल और जौनसार क्षेत्रों में अलग–अलग रूपों में मनाया जाता है।
कैसा त्योहार है फूलदेई?
फूलदेई चैत्र मास की प्रथम संक्रांतिअर्थात मीन संक्रांतिको मनाया जाता है, जो प्रायः हर साल 14 या 15 मार्च को पड़ती है। इसी दिन पहाड़ी सौर कैलेंडर के अनुसार हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है।कुमाऊँ और गढ़वाल में इसे फूलदेई कहा जाता है।बसंत ऋतु में जब जंगलों और आँगनों में प्योंली, बुरांश, सरसों और आड़ू जैसे फूल खिल उठते हैं, तब देवतुल्य बच्चे इन्हीं फूलों से हर घर की देहरी सजाते है।
नववर्ष के स्वागत में फूलों का त्योहार
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सौर पंचांग का प्रयोग होता है, इसलिए यहाँ नववर्ष की शुरुआत फूलदेई से मानी जाती है। इस समय प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में होती है। चारों ओर हरियाली, रंग–बिरंगे फूल और नई ऊर्जा। दुनिया की लगभग हर सभ्यता में नववर्ष स्वागत की परंपरा हैकहीं आतिशबाज़ी, कहीं प्रार्थनालेकिन उत्तराखंड में बच्चों द्वारा फूल चढ़ाकर नववर्ष का स्वागत एक अनोखी सांस्कृतिक पहचान है।