
भोपाल।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कृषि वर्ष-2026 के वैचारिक समागम में किसानों के लिए नई खेती के मॉडल सामने आए है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में लगे स्टॉलों में पारंपरिक फसलों से हटकर ब्लूबेरी, राइस बेरी, स्ट्रॉबेरी और विदेशी सब्जियों की खेती को लेकर खास चर्चा रही। किसानों का कहना है कि कम क्षेत्र में भी इन फसलों से ज्यादा कमाई संभव है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए।
ब्लूबेरी-स्ट्रॉबेरी से कमाई का नया रास्ता
इस अवसर पर अलग-अलग स्टॉल पर ब्लूबेरी, राइस बेरी और स्ट्रॉबेरी की खेती का मॉडल प्रस्तुत किया गया। भारत में इन फसलों की खेती अभी बहुत सीमित है और बाजार में आने वाला लगभग 90 प्रतिशत माल विदेशों से आता है। उनके मुताबिक एक पौधा लगाने में करीब 700 से 800 रुपये की लागत आती है, लेकिन इसकी उत्पादन क्षमता लंबी होती है और एक पौधा करीब 10 साल तक फल देता है।
किसानों की बेहतर आमदनी सरकार का लक्ष्य
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस वर्ष को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले प्रदेश में औद्योगिक वर्ष मनाया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि किसान आधुनिक तकनीक को अपनाएं और खेती से बेहतर आमदनी हासिल करें।