शिमला में सेब को छोड़ जापानी फल की बागवानी कर रहे है बागवान

    16-Mar-2026
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शिमला।हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के नेरवा तहसील के कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कई बागवान अब सेब की जगह जापानी फल की बागवानी कर रहे है। इसका एक कारण बीते कुछ साल से हो रहा जलवायु परिवर्तन है। इससे सेब की फसल में कमी आई है। बागवानों का रुझान सेब की बागवानी को छोड़कर जापानी फल लगाना शुरू कर दिए है।

जापानी फल को तेंदू, अमरफल और रामफल भी कहते है

जापानी फल को पर्सिमोन कहते हैं। भारत के कुछ भागों में इसे तेंदू, अमरफल और रामफल भी कहा जाता है। इसका आकार संतरे जितना होता है। जापानी फल की 400 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें से हचिया और फूयु सबसे मशहूर है। यह अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार गहरे नारंगी, लाल और मिक्स नारंगी रंग में आती है। इसका पेड़ सेब के पेड़ की तरह होता है।

जापानी फल से कम खर्च में बेहतर उत्पादन

जापीनी फल की बागवानी करने वाले बागवान सलमान के अनुसार सेब के पौधों के रख-रखाव का खर्चा अधिक बढ़ जाने और फसलों के बार-बार टूटने के कारण लोग अब सेब के साथ जापानी फल के पौधे लगा रहे हैं। इस साल दिल्ली की मंडी में गुणवत्ता के आधार पर इस फल की 10 किलो की पेटी 900 से 2500 रुपये तक बिक रही है।