
नई दिल्ली।आज के बदलते समय किसान परंपरागत खेती को छोड़कर नए तरीके से खेती कर रहे है। गेंदा फूल की मांग सभी जगह रहती है। मंदिरों, पूजा-पाठ, विवाह, त्यौहार और सजावट—हर जगह गेंदा फूलों की मांग रहती है। गेंदा फूल इनमें खास है क्योंकि यह न केवल सुंदर दिखता है बल्कि इसकी पंखुड़ियों का उपयोग औषधीय, औद्योगिक और पशुपालन के कार्यों में भी होता है। यही कारण है कि किसान अब गेंदा फूल की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेंदा फूल की खेती सालभर तीनों मौसम में की जा सकती है।
उन्नत किस्में और उनकी विशेषताएं
पूसा बहार अफ्रीकी गेंदा
95–100 दिन में फूल आना शुरू।
पौध ऊंचाई: 75–85 सेमी, पीले और घने फूल।
जनवरी-मार्च में अधिक उत्पादन।
पूसा दीप फ्रेंच गेंदा
85–95 दिन में फूल।
उत्तरी मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
गहरे भूरे रंग के फूल, ऊंचाई 55–65 सेमी।
अक्टूबर-नवंबर में फूल देना शुरू।
पूसा बसंती
135–145 दिन में फूल।
मध्यम आकार के पीले फूल।
बगीचे और गमलों में भी उपयुक्त।
पूसा ऑरेंज मैरीगोल्ड
125–136 दिन में फूल।
बड़े आकार और गहरे नारंगी रंग के फूल।
मुर्गी पालन, औषधि और न्यूट्रास्युटिकल उद्योग में उपयोग।