
लखनऊ।उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में आडू की खेती करने वाले किसानों के लिए जिला उद्यान विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। वर्तमान में आडू की फसल फूल से फल बनने के ‘ट्रांजिशन फेज’ में है। इस दौरान फसलों को कीटों से बचाने और पोषण प्रबंधन की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है। जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को सिंचाई के सटीक तरीकों और जैविक कीटनाशकों के प्रयोग पर जोर देने को कहा है, ताकि फलों की गुणवत्ता बनी रहे और पैदावार में बढ़ोतरी हो सके।
जाने विशेषज्ञों की सलाह
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक के अनुसार आडू के बागवानों को इस समय सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। न तो खेत में अत्यधिक नमी हो और न ही पानी की कमी हो पाई। इसके लिए ‘बॉल टेस्ट’ यानी मिट्टी का गोला बनाकर उसकी नमी जांचने का सबसे सटीक तरीका है।
इतनी मात्रा जरूरी
पौधों को स्वस्थ रखने के लिए एनपीके के अलावा बोरान का छिड़काव फल की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है। अगर बाग में कीटों का प्रभाव दिखे, तो 0.5 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके अलावा, नीम ऑयल एक बेहतरीन और प्रभावी जैव-कीटनाशक है, जिसका 4 मिलीलीटर प्रति लीटर के हिसाब से प्रयोग किया जा सकता है।