बारिश और नमी के कारण आम की फसल को मुकसान, बचाव के लिए विशेषज्ञ ने दिए ये खास सुझाव

    21-Mar-2026
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नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश और बिहार में आम केवल फल नहीं है, बल्कि लाखों किसानों की आजीविका और अर्थव्यस्था की रीढ़ है। मार्च का महीना इन बागवानो के लिए सबसे अहम माना जाता है। क्योंकि इसी समय पेड़ों पर 'बौर'  आते हैं और धीरे-धीरे 'टिकोले' बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इस साल बिहार और उत्तर प्रदेश के बागों में बौर की स्थिति बहुत अच्छी देखी जा रही है, जो बंपर पैदावार का संकेत है। हालांकि, प्रकृति का मिजाज इस सुनहरे भविष्य के आड़े आ रहा है। मार्च के महीने में अचानक हो रही बारिश, बादलों का डेरा और बढ़ती नमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

बारिश से हो सकती है नुकशान

आम की फसल इस समय बेहद संवेदनशील अवस्था में है। ऐसे में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से न केवल बौर झुलस सकते हैं, बल्कि परागण की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है। अगर इस समय सावधानी न बरती गई, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है

बारिश के बाद रोगों से बचने का तरीका

आम की फसल के लिए दूसरा सबसे बड़ा दुश्मन खर्रा रोगहै, जिसे आम भाषा में 'दहिया' भी कहा जाता है। इसमें बौर और छोटे फलों पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे फल बनने से पहले ही गिर जाते हैं। डॉ. एस. के. सिंह बताते हैं कि जब तापमान 18 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच हो और सुबह-शाम नमी रहे, तब यह रोग ज्यादा सक्रिय होता है।