बागवानों को एवोकैडो की बागवानी के बारे में दी गई जानकारी

    25-Mar-2026
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हमीरपुर।औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नेरी में एवोकैडो की खेती पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला शुक्रवार को संपन्न हुई। कार्यशाला में प्रदेश के उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के 20 किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला के समापन पर विश्वविद्यालय के डीन डॉ. डीपी शर्मा बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। उन्होंने कहा एवोकैडो जैसी उच्च मूल्य वाली कम लागत वाली फसलें न केवल फल उत्पादन के लिए अपनाने के लिए, बल्कि नर्सरी उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के क्षेत्र में उद्यमी बनने के लिए भी योगदान देती हैं।

एवोकैडो की नर्सरी के बारे में जानकारी दी गई

कार्यशाला में फल विज्ञान विभाग के प्रो. और विभागाध्यक्ष डॉ. शशि के. शर्मा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने प्रदेश में एवोकैडो के पोषण संबंधी महत्व और व्यावसायीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। परियोजना के कार्यक्रम प्रभारी डॉ. विकास के.शर्मा ने हिमाचल में एवोकैडो की खेती के महत्व, संभावनाओं, उत्पादन तकनीक, बाग प्रबंधन और नर्सरी उगाने की तकनीकों के बारे में जानकारी दी।

कैसे करें एवोकैडो की बागवानी

एवोकैडो की बागवानी के लिए अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी और गर्म-नम जलवायु सबसे अच्छी है। भारत में फरवरी-मार्च या अक्टूबर-नवंबर में 8-10 मीटर की दूरी पर पौधे लगाएं। यह एक उच्च-मूल्य वाली फसल है जो 4-5 साल बाद फल देना शुरू करती है।