रायपुर।कहते है कुछ करने का प्रण कर लिया जाए तो कठीन से कठीन काम को भी बेहद आसान बनाया जा सकता है। ऐसा ही एक उदाहारण देखने को मिला है छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कोंडागांव जिले की रहने वाली अपूर्वा त्रिपाठी आज देश की उभरती हुई महिला एग्रीप्रेन्योर है। वे एम.डी. बोटैनिकल्स की संस्थापक तथा मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म्स एंड रिसर्च सेंटर में क्वालिटी कंट्रोल प्रमुख के रूप में कार्य कर रही हैं। उनके देखरेख में जैविक औषधीय पौधों पर आधारित एक ऐसा कृषि-उद्यम विकसित हुआ है, जो किसानों को बेहतर आय और बाजार उपलब्ध करा रहा है।
छत्तिसगढ़ की प्रकृतिक से मिल रही है समृद्धि
छत्तिसगढ़ के बस्तर और कोंडागांव की जनजातीय और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध धरती पर पली-बढ़ी अपूर्वा त्रिपाठी ने बचपन से ही प्रकृति और कृषि के साथ गहरा संबंध महसूस किया। बता दें कि बस्तर की मिट्टी में औषधीय पौधे की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहं के आदीवासी पारंपरिक ज्ञान की समृद्ध विरासत ने उनके विचारों को गहराई से प्रभावित किया है
पिता है हर्बल वैज्ञानिक
अपूर्वा की प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत उनके पिता डॉ. राजाराम त्रिपाठी हैं, जो देश के प्रसिद्ध हर्बल वैज्ञानिक और सफल किसान हैं। वर्ष 1996 में उन्होंने मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म्स एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना की थी। पिछले लगभग तीन दशकों में इस संस्थान ने औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।