लखनऊ।उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के करौंदीकला क्षेत्र की ग्राम पंचायत बांगरकला के प्रगतिशील किसान विनय प्रकाश सिंह अमरूद की बागवानी से अपनी आय दोगुनी कर रह हैं। उन्होंने परंपरागत खेती से हटकर यह सफलता हासिल की है और अब वे क्षेत्रीय किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। विनय प्रकाश सिंह पिछले सात वर्षों से एक एकड़ भूमि पर अमरूद की बागवानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह खेती फायदे का सौदा है, जिसमें लागत का दोगुना तक मुनाफा होता है। एक बीघा अमरूद की बागवानी में लगभग 50 हजार रुपये की लागत आती है।
उद्यान विभाग से मिला सहयोग
किसान विनय प्रकाश सिंह के अनुसार छुट्टा और जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान के कारण उन्होंने खेती का तरीका बदला। इसी दौरान, सुल्तानपुर के उद्यान विभाग से प्रेरणा लेकर उन्होंने अमरूद की खेती शुरू की।
अमरूद की बिक्री के लिए दूर जाना पड़ता है
अमरूद की बिक्री के लिए उन्हें दूर नहीं जाना पड़ता था, कादीपुर, सूरापुर, करौंदीकला, पट्टीनरेंद्रपुर, जौनपुर, खुटहन और शाहगंज जैसे स्थानीय बाजारों में उनके अमरूद आसानी से बिक जाते हैं। कई बार व्यापारी सीधे खेत से ही फल खरीद लेते हैं।