शिमला।हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर बुशहर में नोगवैली के मध्यम ऊंचाई वाले सेब बहुल क्षेत्रों में बागवानी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में सेब के बगीचे पिंकबड स्टेज में हैं। बागवानों को सालभर की मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है। मौसम के अचानक बदलाव से सेब की टहनियों में फूल की जगह सीधे पत्ते आ रहे हैं। कहीं फूल आने भी शुरू हो चुके हैं, लेकिन खराब मौसम के चलते तापमान में गिरावट आई है।
ओलावृष्टि बना बड़ा संकट
इससे सेब की सेटिंग पर सीधा असर पड़ता है। बागवानों के लिए ओलावृष्टि भी बड़ा संकट बन गई है। सोमवार को नोगवैली और आसपास के क्षेत्रों में दोपहर बाद बारिश का दौर शुरू हुआ। बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक 25 फीसदी फूल आने पर बागवानों को दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए और साथ ही मधुमक्खियों के बॉक्स बगीचे के इर्द-गिर्द स्थापित करने चाहिए ताकि फूलों की सेटिंग पर्याप्त मात्रा में हो सके।
मौसम की मार के कारण दिक्कत हुई
बागवानों को महंगे दामों पर बाजार से दवाइयां और अन्य बागवानी उपकरण खरीदने को बाध्य होना पड़ता है। बागवानी और राजस्व विभाग का काम कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है। धरातल पर कुछ भी अमल नहीं होता। बहरहाल, मौसम की मार के कारण बागवानों की परेशानी बढ़ी हुई है।