आम के बागों को अप्रैल में ऐसे करें देखभाल मिलेगा बेहतर उत्पादन

    31-Mar-2026
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नई दिल्ली।भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है। उत्तरी हिस्से में आम की फसल पर बौर आ चुके हैं। पूरा पेड़ मंजर से भरा हुआ है। राज्यों में अगर उत्तर प्रदेश और बिहार की बात करें तो यहां के बड़े स्तर पर आम की बागवानी की जाती है। लाखों किसानों की कमाई का यह सहारा है। यहां की जलवायु आम की कई किस्मों के लिए उपयुक्त है। जिससे मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बागवानी की जाती है।

मौसम के हिसाब से करें खेती

आम की प्रजातियों से अच्छी क्वालिटी के फल लेने के लिए मौसम के हिसाब से कृषि कार्य किए जाने चाहिए। रोपाई से लेकर आम के पकने तक किसानों को ध्यान रखना चाहिए ताकि पेड़ पर कीटों और रोगों का प्रकोप नहीं हो। आम के पेड़ से फल अपने समय से ही मिलते हैं, लेकिन बाग में खाद, पानी, निराई, गुड़ाई, रोगों और कीटों की रोकथाम का काम पूरे साल चलता रहता है।

अप्रैल में रखे इन बातों का रखे ध्यान

फलों को गिरने से रोकने के लिए एनएए 20 पीपीएम का छिड़काव करना बेहद जरुरी होता है। पत्ती काटने वाली सूंडी के नियंत्रण के लिए कार्बोरिल का एक छिड़काव करना चाहिए।

गुम्मा व्याधि ग्रस्त बौर को हटा देना चाहिए

जब फल मटर के दानों के बराबर हो जाएं तो सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए। थाले बना कर 10-15 दिनों के अंतराल पर 2-3 सिंचाई करनी चाहिए। आम बाग में फल मक्खी के नियंत्रण के लिए मिथाइल यूजीनाल गंध ट्रैप लगाना चाहिए। यदि ईंट के भट्टे बाग के पास हों या आम के बाग की भूमि बलुई हो तो कोयलिया और आंतरिक ऊतक सड़न के समाधान के लिए बोरेक्स 1 प्रतिशत  का छिड़काव अंतिम सप्ताह में करना चाहिए।