
नई दिल्ली।भारत में बड़े पैमाने पर आम की बागवानी की जाती है। देश के लगभग 22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है, लेकिन अक्सर किसान जानकारी के अभाव में मंजर, फल बनने की अवस्था पर कुछ गलतियां कर बैठते हैं, जिससे भारी नुकसान होता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा बिहार के प्लांट पैथालोजी के हेड डॉ एस. के. सिंह के अनुसार, आम के मंजर से फल बनने तक का सफर धैर्य और वैज्ञानिक सूझबूझ का है। अगर किसान संतुलित सिंचाई, सही समय पर कीटनाशक का चुनाव और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें, तो न केवल फलों की संख्या बढ़ेगी बल्कि उनकी गुणवत्ता भी लाजवाब होगी।
टिकोले नहीं झड़ने के लिए क्या करें
डॉ एस, के. सिंह ने सुझाव दिया कि जब छोटे फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब उन्हें पोषण देना बहुत जरूरी है ताकि वे झड़ें नहीं। इस अवस्था में पौधों को अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है। पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव और बोरॉन 0.2% या बोरॉन और जिंक का छिड़काव परागण और निषेचन प्रक्रिया को मजबूत बनाता है और फल की पकड़ को मजबूत बनाता है।
ज्यादा गर्मी बढ़ने लगे तो करें यह काम
कीटनाशकों का प्रयोग हमेशा शाम के समय करना बेहतर होता है। जब मधुमक्खियां अपने छत्ते में वापस लौट चुकी हों. बाग के आसपास गेंदा या अन्य फूल वाले पौधे लगाएं ताकि परागण करने वाले कीट आकर्षित हों। पिछले कुछ वर्षों में मौसम के मिजाज में काफी बदलाव आया है। कभी अचानक तेज गर्मी तो कभी बेमौसम बारिश आम की फसल को नुकसान पहुंचाती हैं।