
रायपुर।छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह बनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही है। छिंदगढ़ ब्लॉक के लिथिरास गांव में महिलाओं ने जंगली खजूर के पेड़ों यानी ‘छिंद’ के रस से प्राकृतिक गुड़ बनाकर स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता खोला है। यह पहल “वोकल फॉर लोकल” अभियान के तहत शुरू की गई है।
महिलाओं को दी जा रही हैं ट्रेनिंग
सुकमा जिला पंचायत के सीईओ मुकुंद ठाकुर के अनुसार बताया कि इस काम के लिए कई स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। ट्रेनिंग के दौरान विशेषज्ञों ने महिलाओं को जंगली खजूर के पेड़ों से सुरक्षित तरीके से रस निकालने और उससे गुड़ तैयार करने की पूरी प्रक्रिया सिखाई। शुरुआत में 2-3 स्वयं सहायता समूहों की करीब 20-30 महिलाओं को इस तकनीक की ट्रेनिंग दी गई है।
पहल को बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी
उन्होंने बताया कि इस पहल को अभी छोटे स्तर पर शुरू किया गया है, लेकिन आने वाले समय में इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ा जा सके। सुकमा और आसपास के क्षेत्रों में जंगली खजूर के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं,इसलिए यह गतिविधि यहां के लिए काफी संभावनाएं रखती है।