शिमला।हिमाचल प्रदेश के शिमला के जुन्गा तहसील मे सेब, आड़ू, प्लम और खुमानी की बागवानी के बाद किसानों का रुझान अब पर्सिमोन अर्थात जापानी फल के उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। जुन्गा तहसील के ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में सेब की बागवानी अवश्य की जा रही है लेकिन अधिकांश किसान नकदी फसलें उगा रहे हैं। पीरन पंचायत के धाली बागड़ा में किसानों द्वारा पर्सिमोन अर्थात जापानी फल की पौध तैयार की जा रही है जोकि किसानों के लिए एक नया अनुभव है।
एक पौधा लगाने पर 200 रुपये का खर्च
स्थानीय किसानो के अनुसार पौधे को तैयार करने में दो सौ रुपये तक का खर्च आता है जबकि तैयार पौधे की भी मार्केट में बहुत मांग है। उन्होंने कहा कि पीरन पंचायत और धाली बागड़ा गांव का जलवायु इस फल के उत्पादन के लिए सर्वोत्तम माना जा रहा है।
जापानी फल की मार्केट की ज्यादा मांग
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार जापानी फल का पौधा समुद्रतल से 800 से 1500 सौ मीटर की ऊंचाई तक उगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस जापानी फल की मार्केट में बहुत मांग है। इस फल में फाइबर, विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे मनुष्य शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।