नई दिल्ली।आज के बदलते समय में किसान परंपरागत खेती से हटकर फलों की खेती कर रहे है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन स्थित महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ हलधर के अनुसार छत्तीसगढ़ की लजवायु और मौसम सीताफल की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। अगर किसान सही तकनीक से सीताफल की बागवानी करें तो उन्हें बेहतर कमाई हो सकती है।
अप्रैल और मई बागवानी के लिए उपयुक्त
वैज्ञानिकों के अनुसार छत्तीसगढ़ में सीताफल की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें बालानगर और अरका सेहन प्रमुख हैं। वैज्ञानिक बताते है कि विशेष रूप से बालानगर किस्म को बरसात से पहले लगाना अधिक लाभकारी होता है। इसके लिए अप्रैल से मई माह के बीच खेत की अच्छी तरह तैयारी कर पौधरोपण करना चाहिए।
पौधे लगाने का तरीका
वैज्ञानिकों ने तकनीकी जानकारी देते हुए कहा कि सीताफल के पौधे लगाने के लिए 3×3 मीटर की दूरी पर गड्ढे तैयार करने चाहिए। प्रत्येक गड्ढे में 20 से 30 किलो गोबर खाद, 100 ग्राम यूरिया, 100 ग्राम पोटाश और 100 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट मिलाकर डालना चाहिए।