फूलों पर बर्फ, खेतों में बिछी फसल ! हिमाचल में मौसम ने बिगाड़ी खेती की तस्वीर

    09-Apr-2026
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हिमाचल प्रदेश। असमय बर्फबारी और लगातार बारिश ने प्रदेश के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सेब, गेहूं समेत रबी की अन्य फसलों पर संकट गहराता जा रहा है। राज्य सरकार के कृषि और बागवानी निदेशालयों ने इस संबंध में फील्ड से रिपोर्ट तलब की है।

इन दिनों सेब की फ्लावरिंग और सेटिंग का महत्वपूर्ण चरण चल रहा है, जिसमें 22-25 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल होता है, लेकिन बर्फबारी और लगातार बारिश से तापमान गिर गया है। इससे फूलों के विकास पर असर पड़ रहा है। वहीं, बारिश के कारण सेब के फूलों पर परागण धुलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

बागवानों का मानना है कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो फसल को करीब 10 फीसदी तक नुकसान हो सकता है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन बागवानी विभाग की ओर से फील्ड में निरीक्षण के बाद ही किया जाएगा।

हमीरपुर जिले में दो दिन से हो रही बारिश ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश और ओलावृष्टि से आम-लीची सहित अन्य फलदार पौधों के फूल झड़ गए हैं। वहीं, बारिश से गेहूं की फसल पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है। कई जगह तेज बारिश और हवा से फसल खेतों में बिछ गई है जिससे उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। जिले में 28 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई हुई है।

मंडी जिले के सराज और गोहर ब्लाॅक में ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। फील्ड से रिपोर्ट विभाग के अधिकारियों के पास पहुंच गई है। सराज ब्लाॅक में ओलावृष्टि से नकदी फसलों को 50 लाख का नुकसान हुआ है। इसी तरह गोहर ब्लाॅक में भी 16.9 लाख का नुकसान हुआ है। कांगड़ा जिले में लगातार बारिश से गेहूं और आलू की फसल को नुकसान पहुंचने लगा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने कहा कि सेब की फ्लावरिंग के दौरान बगीचों में हुई असमय बर्फबारी और बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे फील्ड अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। राज्य कृषि विभाग के निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसराेटिया ने कहा कि जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल हवा और बारिश से गिर गई है, वहां नुकसान हुआ है। इस पर फील्ड अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।

अगर मौसम का यही मिजाज जारी रहा तो फसलों को और बड़ा नुकसान हो सकता है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बढ़ गया है।