
Mango Farming Farmer's Alert : मई के महीने में मौसम का लगातार बदलता मिजाज आम किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। कहीं बेमौसम बारिश तो कहीं तेज गर्मी का असर इस आम की फसल पर साफ़ देखने को मिल रहा है। बढ़ती नमी के कारण बागों में चेपा और फुदका जैसे कीट तेजी से फैल रहे हैं, जो पेड़ों और फलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। अगर समय रहते इन रोगों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो फल खराब हो सकते हैं और किसानों को बाजार में सही दाम नहीं मिल पाएंगे।
NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, मई का महीना आम की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी समय फलों का आकार बढ़ता है और उनकी गुणवत्ता तय होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक चेपा और फुदका जैसे कीट पत्तियों और छोटे फलों का रस चूसते हैं।
इससे पेड़ कमजोर होने लगते हैं, पत्तियां मुड़ जाती हैं और फलों की चमक खराब हो जाती है। कई बार फल समय से पहले गिरने लगते हैं। किसानों को इस समय बागों की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही तुरंत उपाय किए जा सकें।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आम के पेड़ों की जड़ों और तनों की सुरक्षा करना बेहद जरूरी है। इसके लिए पेड़ के तने पर जमीन से करीब 2 से 3 फीट ऊपर तक चूने का लेपन करना फायदेमंद माना जाता है। इससे कई तरह के कीट और फफूंद पेड़ से दूर रहते हैं।
चूने का लेपन करने के बाद उस हिस्से को प्लास्टिक की पन्नी से ढक दिया जाए तो और बेहतर सुरक्षा मिल सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे पेड़ों पर वार्म और अन्य कीटों का खतरा कम हो जाता है। साथ ही पेड़ स्वस्थ रहते हैं और फल गिरने की समस्या भी कम होती है। किसानों को बागों में पानी का सही प्रबंधन भी करना चाहिए क्योंकि ज्यादा नमी रोगों को बढ़ाने का काम करती है।
चेपा और फुदका जैसे रोगों से बचाव के लिए समय पर दवाओं का छिड़काव करना जरूरी माना गया है। कीट नियंत्रण के लिए स्पिनोसेड 45 एससी दवा के इस्तेमाल की भी सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार 0.3 एमएल दवा को एक लीटर पानी में मिलाकर सुबह या शाम के समय छिड़काव करना प्रभावी माना जाता है। साथ ही किसानों को जरूरत से ज्यादा दवा के उपयोग से बचने की सलाह दी गई है। नियमित अंतराल पर बागों का निरीक्षण करना भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय बागों में नमी का संतुलन और साफ़ सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ज्यादा सूखापन और ज्यादा नमी दोनों ही फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अगर किसान समय रहते बचाव के उपाय अपनाते हैं तो आम की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है। इससे बाजार में फलों की मांग भी बढ़ती है और किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं।