
Paddy Farming New Technique : पंजाब के संगरूर के छोटे से गाँव पेदनी के किसान गुरसेवक सिंह ने धान की रोपाई को आसान बनाने का ऐसा देसी जुगाड़ तैयार किया है जिसने किसानों की बड़ी समस्या का हल निकाल दिया है।
पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई में जहाँ मजदूरों को घंटों कीचड़ में झुककर काम करना पड़ता था, वहीं अब बिना झुके और बिना ज्यादा थके रोपाई का काम तेजी से हो रहा है।
जब भी धान की खेती का समय आता है तो सबसे बड़ा काम होता है कीचड़ भरे खेतों में उसकी रोपाई करना। जून-जुलाई की तीखी धूप और उमस भरे मौसम में घंटों झुककर काम करने के लिए सबसे बड़ी मुसीबत आती है मजदूरों की भारी किल्लत की। मजदूरों की कमी, बढ़ती मजदूरी और समय पर रोपाई न होने से किसानों की लागत लगातार बढ़ रही थी। इसी समस्या से परेशान होकर गुरसेवक सिंह ने अनोखा उपाय निकाला है।
उन्होंने एक 14 फीट लंबा ट्रैक्टर से चलने वाला 'प्लैंकर' (लकड़ी तख्ता, जिसे आम भाषा में सुहागा या पाटा भी कहते हैं) तैयार किया है। इस प्लैंकर के ऊपर उन्होंने एक नालीदार शीट फिट कर दी, जो मजदूरों के खड़े होने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित प्लेटफॉर्म का काम करती है। यह साधारण सा दिखने वाला ढांचा आज धान के किसानों के लिए एक बहुत बड़ा वरदान साबित हो रहा है।
यह अनोखी और शानदार तरकीब बेहद आसान है। खेत को अच्छे से कद्दू करने के बाद, इस 14 फीट लंबे प्लैंकर को ट्रैक्टर के पीछे जोड़ दिया जाता है। इस प्लैंकर पर बने प्लेटफॉर्म पर एक साथ छह लोग बड़े आराम से खड़े हो सकते हैं। ट्रैक्टर को बहुत ही धीमी रफ्तार में चलाया जाता है।
जैसे-जैसे ट्रैक्टर धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, प्लेटफॉर्म पर मौजूद छह मजदूर अपने हाथ में थामी हुई नर्सरी पौध को खेत में रोपते चले जाते हैं। हर एक शख्स एक बार में 3 कतारों में धान लगाने का काम करता है, यानी एक ही फेरे में कुल 18 कतारें लग जाती हैं।
इस तरीके से न तो मजदूरों को कीचड़ में लगातार चलना पड़ता है और न ही घंटों झुककर अपनी कमर तोड़नी पड़ती है।
गुरसेवक सिंह के इस जुगाड़ी तकनीक से किसानों को सीधे तौर पर दो बड़े फायदे हुए हैं- समय और पैसों दोनों की बचत। किसान का दावा है कि इस देसी तकनीक से धान रोपाई में समय और लागत दोनों में करीब 35 फीसदी तक बचत हो रही है। प्रति हेक्टेयर लगभग 3,500 से 4,000 रुपये तक की बचत संभव हो रही है। यही वजह है कि अब आसपास के किसान भी इस तकनीक में अपनी रूचि दिखा रहे हैं।