Cultivation Of Sarpgandha : हाई वैल्यू मेडिसिनल क्रॉप सर्पगंधा बन रही किसानों की पहली पसंद

    11-May-2026
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Cultivation Of Sarpgandha : खेती की बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों के घटते मुनाफे के बीच किसान अब वैकल्पिक और ज्यादा फायदा देने वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में औषधीय पौधा सर्पगंधा धीरे-धीरे किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। सर्पगंधा एक ऐसी फसल है जिसमें मेहनत के साथ पानी भी कम चाहिए और बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। दवा कंपनियों में इसकी बढ़ती मांग के चलते कई किसान अब इसकी खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

सर्पगंधा एक औषधीय पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Rauvolfia serpentina है। इसकी सबसे जरूरी चीज इसकी जड़ें होती हैं, जिनसे कई तरह की दवाइयां बनाई जाती हैं। इसका यूज मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर, तनाव और चिंता, अनिद्रा और मानसिक कमजोरी जैसी समस्याओं में किया जाता है।

सर्पगंधा की खेती के लिए बहुत ज्यादा गर्मी या सर्दी ठीक नहीं होती है। इसके लिए हल्का गर्म और नम मौसम सबसे अच्छा माना जाता है। यह पौधा हल्की छाया में बेहतर बढ़ता है। बहुत तेज धूप में इसकी ग्रोथ कम हो जाती है, जिन क्षेत्रों में 1000 से 1800 मिमी तक वर्षा होती है, वहां इसकी खेती अच्छी होती है।

सर्पगंधा की खेती के लिए हल्की या मध्यम दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए और मिट्टी का pH स्तर 6 से 7.5 के बीच बेहतर माना जाता है।

सर्पगंधा की खेती बीज और पौध रोपाई दोनों तरीकों से की जा सकती है। बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोकर जून-जुलाई में नर्सरी तैयार की जाती है। करीब 45 से 60 दिनों में पौधे खेत में लगाने योग्य हो जाते हैं।

सर्पगंधा की फसल को ज़्यादा पानी नहीं चाहिए होता है। इसके लिए बारिश के मौसम में अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। गर्मियों में 15-20 दिन के बाद सिंचाई करें। साथ ही खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए। वहीं शुरुआती 3 महीनों में 2-3 बार निराई-गुड़ाई जरूरी है। इसके अलावा कीट लगने पर नीम तेल या जैविक घोल का यूज करें।

सर्पगंधा की फसल तैयार होने में लगभग 18 से 24 महीने (1.5 से 2 साल) का समय लगता है। जब पौधे की जड़ें मोटी और मजबूत हो जाएं, तब इसकी खुदाई की जाती है। इसके पौधों को जड़ों सहित उखाड़ा जाता है। जड़ों को अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है फिर इन्हें छांव में सुखाया जाता है। सूखने के बाद इन्हें बाजार में बेचा जाता है या कंपनियों को दिया जाता है।

एक हेक्टेयर में लगभग 8 से 30 क्विंटल तक सूखी जड़ का उत्पादन मिल सकता है। बाजार में इसकी कीमत 450 से 700 रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है। ऐसे में किसान एक हेक्टेयर से 4 लाख से 6 लाख रुपये या उससे अधिक की कमाई कर सकते हैं।