
Gular Tree Farming : आज के दौर में हर कोई एक्स्ट्रा इनकम चाहता है। ऐसे में किसान भी पीछे नहीं हैं। अब किसान केवल गेहूं, धान और पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहना चाहते बल्कि वे ऐसी खेती की तरफ बढ़ रहे हैं, जिससे लंबे समय तक लगातार कमाई हो सके।
पेड़ों की खेती भी किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनती जा रही है। खासकर ऐसे पेड़, जिनकी लकड़ी, पत्तियां और फल बाजार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं। इन्हीं पेड़ों में गूलर का पेड़ भी शामिल है। यह पेड़ कम देखभाल में आसानी से तैयार हो जाता है और बाजार में इसकी काफी मांग रहती है। इसकी पत्तियां, फल, जड़ और छाल का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाएं बनाने में किया जाता है। वहीं इसकी लकड़ी से सुंदर और महंगे फर्नीचर भी तैयार किए जाते हैं।
औषधीय गुणों से भरपूरगूलर का पेड़ अपने औषधीय गुणों के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। इसकी छाल, फल और पत्तियों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है। गांवों में लोग लंबे समय से इसका इस्तेमाल घरेलू इलाज में भी करते आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गूलर की पत्तियां और फल शरीर की सूजन कम करने में मददगार माने जाते हैं। इसके अलावा पुराने घावों पर इसकी पत्तियों का लेप लगाने की भी सलाह दी जाती है। आजकल आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से गूलर के पेड़ से मिलने वाले हिस्सों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
इसकी लकड़ी की बाजार में भारी मांगगूलर के पेड़ की लकड़ी मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है। इसलिए इससे फर्नीचर तैयार किया जाता है। बाजार में गूलर की लकड़ी से बने टेबल, कुर्सी और सजावटी सामान की मांग रहती है।
कम खर्च ज़्यादा मुनाफा किसानों के लिए यह पेड़ इसलिए भी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें ज्यादा खर्च नहीं आता। एक बार पौधा लगाने के बाद सामान्य देखभाल से यह धीरे-धीरे बड़ा हो जाता है। करीब 7 से 8 साल में पेड़ पूरी तरह तैयार हो जाता है। इसके बाद किसान लकड़ी बेचकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खाली पड़ी जमीन में ऐसे पेड़ लगाना किसानों के लिए भविष्य की बचत जैसा होता है। इससे खेती के साथ अतिरिक्त आय भी मिलती रहती है। गूलर की खेती कम लागत में 3 से 4 लाख रुपये तक सालाना मुनाफा दे सकती है।