Arsenic Free Rice Research : चावल में छिपे ज़हर पर वैज्ञानिकों की बड़ी जीत! NBRI की खोज से खत्म होगा आर्सेनिक का खतरा

    12-May-2026
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Arsenic Free Rice Research : लखनऊ स्थित National Botanical Research Institute (NBRI) के वैज्ञानिकों ने चावल को आर्सेनिक मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी वैज्ञानिक सफलता हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक विशेष प्रोटीन 'ओएसईएलपी' की पहचान की है, जो धान की जड़ों में प्राकृतिक फिल्टर की तरह कार्य करता है और हानिकारक आर्सेनिक को पौधे के ऊपरी हिस्सों तक पहुंचने से रोकता है।

यह महत्वपूर्ण शोध वरिष्ठ वैज्ञानिक Dr. Debashish Chakravarty के नेतृत्व में किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Plant, Cell and Environment में प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में आर्सेनिक मुक्त धान की किस्में विकसित करने और सुरक्षित खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘ओएसईएलपी’ प्रोटीन धान की जड़ों के बाहरी हिस्से यानी एपोप्लास्ट में आर्सेनिक को रोक देता है। इससे आर्सेनिक तने, पत्तियों और अंततः चावल के दानों तक नहीं पहुंच पाता।

डॉ. देबाशीष चक्रवर्ती ने बताया कि यह प्रोटीन न केवल आर्सेनिक के प्रभाव को कम करता है, बल्कि पौधों की वृद्धि और उनकी तनाव सहन क्षमता को भी बेहतर बनाता है। इससे भविष्य में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ धान की किस्में विकसित करने का मार्ग खुल सकता है।

स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है आर्सेनिक
विशेषज्ञों के मुताबिक, आर्सेनिक युक्त चावल का लंबे समय तक सेवन कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इससे कैंसर, किडनी और लिवर संबंधी समस्याओं के साथ हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ता है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है, जबकि गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं के लिए यह अधिक खतरनाक माना जाता है।

खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खेती को मिलेगा बढ़ावा
संस्थान के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने कहा कि यह खोज खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खेती के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।उनके मुताबिक, इस तकनीक से भविष्य में करोड़ों लोगों को सुरक्षित चावल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और पर्यावरण अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।