
Golden berry In Kitchen Garden : अगर आपको घर में फल और सब्ज़ियां उगाना पसंद है और आप अपने घर की छत, बालकनी या छोटे गार्डन में कोई ऐसा फल उगाना चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद हो, तो रसभरी एक जबरदस्त ऑप्शन हो सकती है। विटामिन-सी, फाइबर और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर रसभरी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पाचन सुधारने में मदद करती है। ख़ास बात यह है कि इसे गमले या ग्रो-बैग में भी आसानी से उगाया जा सकता है।
धूप वाली जगह रसभरी के पौधे की अच्छी बढ़वार के लिए ऐसी जगह चुनना ज़रूरी है जहां रोजाना 6 से 8 घंटे धूप आती हो। इसे घर की खुली जगह, छत, बालकनी या किचन गार्डन में लगाया जा सकता है, जहाँ हवा का संचार भी होता रहे।
मिट्टीरसभरी के लिए हल्की, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद या कंपोस्ट मिलाने से पौधे को जरूरी पोषण मिलता है और फल उत्पादन अच्छा होता है।
बीज बोने का तरीकारसभरी के फल से निकाले गए बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोकर रखें। इसके बाद बीजों को क्यारी, 12-15 इंच के गमले या ग्रो-बैग में बो दें। यदि तैयार पौधा खरीद रहे हैं, तो उसे सावधानी से मिट्टी में लगाएं और जड़ों के आसपास मिट्टी अच्छी तरह दबा दें।
सिंचाई और देखभालपौधों की मिट्टी को हल्का नम बनाए रखना जरूरी है, लेकिन ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए। मिट्टी सूखने लगे तो सिंचाई करें। हर महीने जैविक खाद देने से पौधे की बढ़वार बेहतर होती है। वहीं, हर तीन महीने में हल्की रासायनिक खाद भी दी जा सकती है।
कब बोयें ?रसभरी की बुवाई जून के मध्य में करना बेहतर माना जाता है। जुलाई-अगस्त तक पौधे 20-25 सेंटीमीटर ऊंचे हो जाते हैं, जिसके बाद इन्हें बड़े गमले या क्यारी में लगाया जा सकता है।
सर्दियों में रखें खास ध्यानसर्दियों के मौसम में पौधों को पाले से बचाना बेहद जरूरी होता है। सही देखभाल करने पर फरवरी से अप्रैल के बीच पौधों में फल आने शुरू हो जाते हैं।
कम जगह और कम लागत में रसभरी की खेती घरेलू बागवानी के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इससे परिवार को ताजे और पौष्टिक फल मिलते हैं, साथ ही घर की हरियाली भी बढ़ती है।