
Moringa/Drumstick Farming : सहजन की खेती अब बिहार के किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनती जा रही है। पूर्णिया जिले की अनुकूल जलवायु और उर्वर मिट्टी में यहां के किसानों के लिए अब सहजन (मोरिंगा) की खेती एक बेहतरीन अवसर बनकर उभरी है। बाजार में औषधीय गुणों से भरपूर सहजन की मांग साल भर बनी रहती है। पूर्णिया के भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. विकास कुमार के अनुसार, सहजन का केवल फल ही नहीं, बल्कि इसके फूल, पत्ते और छिलके भी विटामिन, कैल्शियम, आयरन और मिनरल्स से लदे होते हैं।
बाजार में मांग और मुनाफासहजन की खेती किसानों के लिए 'जीरो बजट' खेती जैसा है। बाजार में ऑफ-सीजन के दौरान सहजन ₹200 प्रति किलो तक बिकता है, जबकि सीजन में भी इसकी कीमत ₹80 प्रति किलो से कम नहीं होती। सबसे बड़ी बात यह है कि इस फसल में किसी विशेष रोग या व्याधि का खतरा नहीं होता। एक स्वस्थ पौधा एक सीजन में लगभग 35 से 50 किलो तक फल दे सकता है, जिससे किसानों को लागत के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुनाफा होता है।
उपयुक्त किस्में
पूर्णिया की जलवायु को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने दो प्रमुख वैरायटी PKM-1 और PKM-2 को सबसे बेस्ट बताया है। ये किस्में न केवल तेजी से बढ़ती हैं, बल्कि इनकी पैदावार की गुणवत्ता भी उच्च कोटि की होती है।
सहजन को लगाने के दो मुख्य तरीके हैं:
बीज विधिः यह सबसे प्रभावी तरीका है। बाजार से उन्नत बीज लाकर उन्हें रात भर पानी में भिगो दें। अगले दिन गड्ढा बनाकर बुआई करें। ध्यान रहे कि लाइन से लाइन की दूरी लगभग 45-50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 75-90 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
टहनी विधिः यदि आप घरेलू स्तर पर या कम संख्या में पौधे लगाना चाहते हैं, तो 3 फीट लंबी टहनी काटकर मिट्टी में गाड़ दें। टहनी के ऊपरी हिस्से को गोबर से ढक दें ताकि नमी बनी रहे।
लगाने का समय: नवंबर, दिसंबर और जनवरी के ठंडे महीनों को छोड़कर, आप साल के किसी भी महीने में इसकी बुआई कर सकते हैं।
खाद और प्रबंधन
सहजन के बेहतर विकास के लिए प्रति पौधा 50 ग्राम यूरिया, 50 ग्राम डीएपी और 50 ग्राम पोटाश का प्रयोग करें। उर्वरक को पौधे की जड़ से थोड़ी दूरी पर मिट्टी में मिलाएं। उचित नमी और पोषण मिलने पर मात्र 8 महीने के भीतर पौधे में फूल और फल आने शुरू हो जाते हैं। चूंकि यह एक बार लगाने पर कई वर्षों तक फल देता है, इसलिए पूर्णिया के किसान इसे अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकते हैं।
कम लागत, कम मेहनत और ज्यादा मुनाफे के कारण सहजन की खेती अब किसानों के लिए आधुनिक खेती का एक सफल मॉडल बनती जा रही है।