
Amrapali Mango Size Issue : भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे आम न पसंद हो। यह फल केवल स्वाद और खुशबू के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों की आय और देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आम के आकार में लगातार कमी देखने को मिल रही है। विशेषकर 'आम्रपाली' प्रजाति में यह समस्या तेजी से बढ़ी है। कई बागों में फल का आकार 20 से 50 प्रतिशत तक कम देखा जा रहा है।
बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, यह समस्या केवल खाद या सिंचाई की कमी तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। अगर समय रहते वैज्ञानिक उपाय नहीं अपनाए गए, तो आने वाले सालों उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, पिछले कुछ सालों में मौसम का मिजाज तेजी से बदला है। साल 2024 को देश के सबसे गर्म सालों में गिना गया। बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और गंगा के मैदानी इलाकों में अप्रैल से जून तक तेज लू चली। कई जगह तापमान 44 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस गर्मी का सीधा असर आम के फलों पर पड़ा। फल जल्दी पकने लगे, उनका विकास रुक गया और आकार छोटा रह गया। साल 2025 में भी हालात ज्यादा बेहतर नहीं रहे। मार्च से ही गर्मी शुरू हो गई, बारिश अनियमित रही और मिट्टी की नमी तेजी से कम होती गई।
हालांकि साल 2026 में मौसम कुछ हद तक बेहतर माना जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद आम्रपाली आम के फल अभी भी छोटे दिखाई दे रहे हैं। इससे साफ है कि समस्या केवल एक साल की नहीं, बल्कि लगातार बदलते मौसम का असर है।
आम्रपाली देश की सबसे लोकप्रिय आम किस्मों में से एक है। इसकी खासियत यह है कि छोटे पेड़ पर भी बहुत ज्यादा फल लगते हैं। यही कारण है कि किसान सघन बागवानी में इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं।
लेकिन अब यही विशेषता इसकी कमजोरी बनती जा रही है। एक पेड़ पर जरूरत से ज्यादा फल लगने से पौधे की ताकत हजारों फलों में बंट जाती है। हर फल को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, जिसके कारण फल छोटे रह जाते हैं।
जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है, तब पौधों की भोजन बनाने की क्षमता कम होने लगती है। पत्तियां ठीक से काम नहीं कर पातीं और फल को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती। इसके कारण फल की कोशिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो पातीं। गूदे की मात्रा कम हो जाती है और फल जल्दी पकने लगता है। यही वजह है कि आजकल आम देखने में रंगीन तो लगते हैं, लेकिन उनका आकार छोटा होता है और गुठली बड़ी दिखाई देती है।
अप्रैल से जून के बीच आम के फलों को लगातार नमी की जरूरत होती है लेकिन तेज गर्मी और कम बारिश के कारण मिट्टी जल्दी सूख जाती है। जब पौधे को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो वह तनाव में आ जाता है। फल तक रस और पोषक तत्व सही मात्रा में नहीं पहुंच पाते। इससे गूदे का विकास रुक जाता है और फल सिकुड़े हुए रह जाते हैं।
कई किसान फसल में सिर्फ यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इससे पेड़ देखने में तो खूब हरे-भरे लगते हैं, लेकिन फलों की क्वालिटी और आकार पर बुरा असर पड़ता है। बड़े और अच्छे फल पाने के लिए सिर्फ यूरिया नहीं, बल्कि पोटाश, कैल्शियम, बोरॉन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी जरूरी होते हैं। इनकी कमी होने पर फल छोटे रह जाते हैं। लगातार ज्यादा रासायनिक खाद डालने से मिट्टी की ताकत भी कम होने लगती है। मिट्टी में जैविक तत्व घट जाते हैं और केंचुए भी कम हो जाते हैं, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं।
अगर सघन बागवानी में समय पर पेड़ों की कटाई-छंटाई नहीं की जाए, तो पेड़ों के अंदर तक धूप और हवा ठीक से नहीं पहुंच पाती। इससे पत्तियां कमजोर होने लगती हैं और पौधे सही मात्रा में भोजन नहीं बना पाते। इसका नतीजा यह होता है कि फलों की बढ़वार रुक जाती है और उनका आकार छोटा रह जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ वैज्ञानिक उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए नियमित सिंचाई जरूरी है। अतिरिक्त फलों को हटा दें। पेड़ को संतुलित पोषण दें, जैविक खाद बढ़ाएं, समय पर छंटाई करें और सूखी और भीड़ वाली शाखाओं को हटाने से पेड़ों में धूप और हवा का संचार बेहतर होता है।
यदि बढ़ती गर्मी और अनियमित मौसम का असर इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में आम के फल और छोटे हो सकते हैं। झुलसन, समय से पहले पकना और गूदे की कमी जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए अब केवल ज्यादा उत्पादन पर नहीं, बल्कि अच्छी गुणवत्ता और बड़े आकार वाले फलों पर ध्यान देना जरूरी हो गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर आम के फलों का आकार और गुणवत्ता दोनों सुधारी जा सकती हैं।