
Bitter Gourd Farming : गर्मी का मौसम शुरू होते ही किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है कि ऐसी कौन सी फसल लगाई जाए, जिससे कम समय में ज़्यादा अच्छी आय हो सके। ऐसे में करेले की खेती किसानों के लिए एक बेहतर ऑप्शन साबित हो रही है। खास बात ये है कि ICAR द्वारा विकसित करेले की कुछ खास किस्में कम समय में ज्यादा पैदावार देकर किसानों की कमाई बढ़ा रही हैं।
गर्मियों में बाजार में वैसे ही सब्ज़ियां कम होती हैं।ऐसे में करेले की मांग काफी बढ़ जाती है। लोग इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं, जिससे इसकी बिक्री लगातार बनी रहती है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को जल्दी आय देने का मौका देती है। अगर सही किस्म और तकनीक अपनाई जाए, तो यह खेती बहुत लाभदायक साबित हो सकती है।
पूसा हाइब्रिड-6 पूसा हाइब्रिड-6 (DBGH-542) एक उन्नत किस्म है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने विकसित किया है। यह किस्म खासतौर पर ठंडे और सामान्य इलाकों में अच्छी पैदावार देती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल 44 से 48 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्म से किसान लगभग 34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी कमाई बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है।
पूसा हाइब्रिड-5पूसा हाइब्रिड-5 भी किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं, जो बाजार में जल्दी बिकते हैं और अच्छे दाम दिलाते हैं। यह किस्म गर्मी और बरसात दोनों मौसमों में उगाई जा सकती है। इसकी फसल भी लगभग 44 से 48 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके अलावा यह किस्म कई रोगों के प्रति सहनशील होती है, जिससे किसानों का नुकसान कम होता है और उत्पादन करीब 24.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकता है।
पूसा हाइब्रिड-4 पूसा हाइब्रिड-4 (DBGH-12) करेले की एक खास संकर किस्म है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। यह किस्म लगभग 55 से 60 दिनों में तैयार होती है और सही देखभाल करने पर ज्यादा उत्पादन देती है। अगर मुनाफे की बात करें, तो करेले की इन किस्मों की खेती से किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं। मान लें कि किसान 50 क्विंटल तक उत्पादन करते हैं और बाजार में 40 से 50 रुपये प्रति किलो का भाव मिलता है, तो उन्हें लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये तक का मुनाफा हो सकता है।