
India Fruit Export : भारत अब वैश्विक फल बाजार में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। आज की तारीख में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फल उत्पादक देश बन चुका है और यहां उगने वाले अंगूर, केला और लीची जैसे फलों की मांग विदेशों में लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार अब केवल फसल उगाने पर नहीं बल्कि उसे खेत से सीधे विदेशी सुपरमार्केट तक पहुँचाने पर फोकस कर रही है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नए प्लान ने इस पूरी चेन को काफी स्मार्ट और टेक्नोलॉजी से लैस बना दिया है। जिससे ग्रामीण इकोनॉमी में एक जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का विस्तार होने से अब न केवल फलों की बर्बादी रुकी है बल्कि गांवों में युवाओं के लिए नए करियर ऑप्शंस भी खुल रहे हैं।
खेती को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए अब रिसर्च और टेक्निकल सुधारों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। जिससे फल खराब न हों। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद जैसी बड़ी संस्थाओं को सीधा किसानों और एक्सपोर्टर्स के साथ एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया गया है जिससे लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें खत्म हों। सरकार अब ऐसी सप्लाई चेन तैयार कर रही है. जिसमें प्रोसेसिंग यूनिट्स को खेतों के करीब सेटअप किया जा रहा है।
जिससे फ्रेशनेस बरकरार रहे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में भारत का एग्री-सेक्टर सिर्फ डोमेस्टिक जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इंटरनेशनल मार्केट का लीडर बनेगा। निर्यात बढ़ने से सीधा फायदा किसानों की जेब तक पहुंच रहा है क्योंकि उन्हें अब बिचौलियों के बजाय ग्लोबल रेट्स पर अपनी फसल बेचने का मौका मिल रहा है।
फलों के निर्यात में आई इस तेजी ने भारतीय गांवों को अब बिजनेस हब में तब्दील करना शुरू कर दिया है। कृषि उत्पादों की इंटरनेशनल डिमांड बढ़ते ही अब गांवों में कोल्ड स्टोरेज, पैकिंग सेंटर और क्वालिटी टेस्टिंग लैब्स का जाल बिछ रहा है जिससे लोकल लेवल पर जॉब्स बढ़ी हैं। जब किसान का माल लंदन या दुबई के बाजारों में बिकेगा।
तो उसकी आय पारंपरिक खेती के मुकाबले कई गुना ज्यादा होगी। इस बदलाव में डिजिटल तकनीक का भी बड़ा हाथ है जहां किसानों को सीधा एक्सपोर्ट मार्केट के ट्रेंड्स और डिमांड की रियल-टाइम जानकारी मिल रही है। यह कदम भविष्य में देश की जीडीपी में एग्री-सेक्टर की हिस्सेदारी को और भी मजबूत करने वाला है।