
Modern Farming Tricks : आज के दौर में खेती सिर्फ बड़ी जमीन वालों का खेल नहीं रह गया है। सही तकनीक और स्मार्ट प्लानिंग अपनाकर छोटे किसान भी कम जमीन से शानदार मुनाफा कमा सकते हैं।
केवल एक ही फसल के भरोसे बैठना अब जोखिम भरा माना जा रहा है। छोटे खेतों के लिए मल्टी-क्रॉपिंग यानी एक साथ दो-तीन फसलें उगाना सबसे बेस्ट आइडिया है। मान लीजिए अगर एक फसल का मार्केट रेट गिर भी गया तो दूसरी फसल आपकी जेब भरने का काम कर देती है।
अनाज और दालों के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलकर अब कैश क्रॉप्स यानी नकदी फसलों की तरफ बढ़ना होगा। छोटे खेत में सब्जी, फूल या औषधीय पौधों की खेती करना ज्यादा समझदारी है। मिर्च, टमाटर या गेंदे के फूल जैसी फसलें बहुत कम समय में तैयार हो जाती हैं और मंडी में इनकी डिमांड हमेशा बनी रहती है।
जमीन कम है तो क्या हुआ आप ऊपर की तरफ बढ़ सकते हैं। वर्टीकल फार्मिंग और मचान विधि से खेती करना छोटे किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है। बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी, तोरई और करेला को ऊपर चढ़ाकर आप नीचे की जमीन पर अदरक या हल्दी उगा सकते हैं।
खेती के साथ-साथ डेयरी या मुर्गी पालन को जोड़ना एक सुपरहिट फॉर्म्युला है। इसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग कहते हैं। जहां एक सेक्टर का वेस्ट दूसरे के काम आता है। जैसे गोबर से खाद बनकर खेत की लागत कम करती है और खेत का चारा पशुओं का पेट भरता है। इससे किसान को महीने के अंत में दूध या अंडे बेचकर एक बंधी-बंधाई इनकम मिलती रहती है।
खेत से सीधे मंडी में माल बेचना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। अगर आप अपनी उपज की थोड़ी वैल्यू एडिशन या प्रोसेसिंग कर लें तो दाम दोगुने मिल सकते हैं। जैसे टमाटर बेचने के बजाय उसका सॉस बनाना या मिर्च को सुखाकर पाउडर बेचना।
छोटे खेत में मुनाफा बढ़ाने का सीधा तरीका है अपनी लागत को कम करना। ड्रिप इरिगेशन या बूंद-बूंद सिंचाई अपनाकर आप पानी और लेबर दोनों बचा सकते हैं। खाद के लिए बाजार पर निर्भर रहने के बजाय वर्मी कंपोस्ट या जैविक खाद घर पर ही तैयार करें।