Drone Technique in Sugarcane Farming : गन्ने की खेती में ड्रोन तकनीक का कमाल! 7 मिनट में पूरा खेत, लागत में भारी कटौती

    21-May-2026
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Drone Technique in Sugarcane Farming
: गन्ना किसानों के लिए अब पारंपरिक छिड़काव की जगह ड्रोन तकनीक गेमचेंजर साबित हो रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार, गन्ने में ड्रोन तकनीक के नतीजे काफी अच्छे रहे हैं। संस्थान का कहना है कि यह तकनीक खरपतवार नियत्रण में 80. 2 फीसदी प्रभावी साबित हुई हैं। वहीं, 89 फीसदी पानी की बचत और खेती की लागत में 81.6 फीसदी की बड़ी कमी आई है।

खेती में इस्तेमाल होने वाले इन आधुनिक ड्रोन में टैंक, पंप और स्प्रे नोजल लगाए जाते हैं। इनकी मदद से कीटनाशक, खरपतवार नाशक और उर्वरक सीधे फसलों के ऊपर डाले जाते हैं।

उर्वरकों की होगी बचत, बर्बादी कम
यह नई तकनीक पारंपरिक रूप से हाथों या ट्रैक्टर द्वारा किए जाने वाले छिड़काव की
जगह लेती है। इसके जरिए खेत का बड़ा हिस्सा जल्दी कवर होता है, बेहद सटीकता मिलती है और रसायनों की बर्बादी कम होती है। यह ड्रोन जीपीएस मैपिंग के सहारे तय की गई जगह पर खुद-ब-खुद उड़ता है। इससे सेंटीमीटर स्तर की सटीकता सुनिश्चित होती है और एक ही जगह पर दोबारा रसायन नहीं गिरता।

पानी और उर्वरकों की बड़ी बचत
यह ड्रोन खेतों के थोड़ा ही ऊपर उड़ता है और फसल की सटीक जरूरत के हिसाब से बहुत ही नियंत्रित आकार की बूंदों में रसायन छोड़ता है। इसके कई मॉडल्स में सेंसर भी लगे होते हैं, जो फसल के घनेपन या कीटों के हमले का पता लगाकर उड़ते समय ही छिड़काव की मात्रा को अपने आप एडजस्ट कर लेते हैं।

लागत में कमी और बेहतर उपज
ICAR-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के अनुसार, यह तकनीक किसानों को सटीक छिड़काव, बेहतर नियंत्रण और अधिक उपज प्राप्त करने में मदद कर सकती है।

छिड़काव लागत 380.9 रुपये प्रति हेक्टेयर
संस्थान के मुताबिक, ड्रोन से छिड़काव करने पर लागत भी कम होती है। इस तरीके से छिड़काव का खर्च मात्र 380.9 रुपये प्रति हेक्टेयर आता है। संस्थान ने आगे बताया कि यह तरीका बेजोड़ सटीकता देता है और केवल 7 मिनट से भी कम समय में एक एकड़ खेत को कवर कर लेता है। साथ ही, हाथों से होने वाले छिड़काव की तुलना में इसमें 85% तक पानी का इस्तेमाल कम होता है।

गन्ने जैसी ऊंची फसलों के लिए भी यह बेहद कारगर है। इसके इस्तेमाल से ऊंचाई वाले कीटों, जैसे सफेद मक्खी और अर्ली शूट बोरर को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्व भी डाले जा सकते हैं।

खेती में तेजी से बढ़ती तकनीक अब किसानों की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने का मजबूत जरिया बनती जा रही है। आने वाले समय में ड्रोन तकनीक भारतीय कृषि की तस्वीर बदल सकती है।