Cassava Farming : साबूदाने के पीछे छिपा करोड़ों का बिजनेस! किसान ऐसे कर सकते हैं मोटी कमाई

    21-May-2026
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Cassava Farming
: व्रत के दिनों में साबूदाने की खिचड़ी और खीर लगभग हर घर में बनाई जाती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि साबूदाना सीधे खेतों में नहीं उगता। जो कसावा (Tapioca Root) नाम के एक कंद वाले पौधे की जड़ों से शुरू होता है। भारत में इसकी डिमांड सालभर बनी रहती है और गर्मियों के सीजन में तो इसकी खपत नेक्स्ट लेवल पर पहुंच जाती है।

अगर किसान आधुनिक तरीके से कसावा की खेती करें और इसकी प्रोसेसिंग यूनिट से जुड़ें तो यह बिजनेस गर्मियों के दिनों में तगड़ी कमाई करा सकता है।

ऐसे शुरू होती है साबूदाने की खेती
साबूदाने की खेती यानी कसावा उगाने के लिए सबसे पहले इसके बीजों की जगह इसकी डंडियों का इस्तेमाल किया जाता है जिसे स्टेम कटिंग कहते हैं। इसके लिए करीब 15 से 20 सेंटीमीटर लंबी और स्वस्थ डंडियां चाहिए होती हैं। जिन्हें जमीन में रोपा जाता है।

मिट्टी की बात करें तो इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी सबसे बेस्ट मानी जाती है। जिसमें पानी बिल्कुल न ठहरे। कसावा एक उष्णकटिबंधीय यानी गर्म मौसम की फसल है, जिसके लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान और अच्छी धूप बहुत जरूरी होती है।

इतने महीनों में तैयार होती है फसल
सिंचाई के मामले में इस फसल को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि यह सूखे को आसानी से बर्दाश्त कर लेती है। शुरुआती दौर में हल्की सिंचाई की जरूरत होती है और बाद में सर्दियों के दिनों में महीने में सिर्फ एक या दो बार पानी देना काफी होता है। इस पूरी फसल को तैयार होने में लगभग 8 से 10 महीने का लंबा समय लगता है। जिसके बाद इसकी कंद जैसी जड़ों को जमीन से खोदकर बाहर निकाल लिया जाता है।

फिर फैक्ट्री में होता है यह काम
जब इन कंदों को फैक्ट्री में लाया जाता है तो सबसे पहले पीलिंग मशीन और पानी के हैवी स्प्रे की मदद से इनकी मिट्टी और छिलकों को पूरी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद वर्कर्स इन छिली हुई जड़ों की मैनुअल चेकिंग करते हैं ताकि कोई गंदगी न रह जाए, साफ जड़ों को क्रशिंग मशीन में डाला जाता है जहां शुद्ध पानी के साथ इन्हें पीसकर एक गाढ़ा दूधिया पेस्ट तैयार किया जाता है, जो आगे चलकर साबूदाने का रूप लेता है।

आखिर में ऐसे शेप लेता है साबूदाना

क्रशिंग के बाद तैयार हुए इस दूधिया पेस्ट को रिफाइनिंग प्रोसेस से गुजारा जाता है, जहां फिल्टरों की मदद से स्टार्च और फाइबर्स को अलग कर लिया जाता है. इसके बाद जेट रिफाइनर मशीन से एक्स्ट्रा पानी निकालकर इस पेस्ट को पल्प के रूप में सुखाया जाता है। इस पल्प को तब तक सुखाते हैं जब तक इसमें नमी सिर्फ 12 परसेंट न रह जाए।

सूखे हुए खुरदरे पाउडर को कन्वेयर बेल्ट के जरिए खास ग्लोब्यूल मेकिंग मशीन में भेजा जाता है। यह मशीन पाउडर को 1 एमएम से 7 एमएम के छोटे-छोटे चमकीले दानों का आकार देती है, जिन्हें गर्म प्लेटों पर रोस्ट करके पैक किया जाता है।

गर्मियों और व्रत के सीजन में साबूदाने की भारी मांग रहती है, जिसके कारण यह बाजार में तेजी से बिकता है और किसानों व कारोबारियों के लिए मुनाफे का बड़ा जरिया बनता जा रहा है।