
Kashmir Cherry Farming : कश्मीर की मशहूर चेरी इस बार मौसम की बेरुखी का सामना कर रही है। लगातार बदलते मौसम, असामान्य गर्मी और रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण इस सीजन में चेरी उत्पादन में करीब 45 से 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अच्छी बात यह है कि बाजार में चेरी की मांग बनी हुई है, जिससे कीमतें स्थिर हैं।
चेरी की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान अप्रैल और मई की शुरुआत में हुए मौसम बदलाव से हुआ। पहले सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ी और फिर लगातार रुक-रुक कर बारिश होती रही। इसका असर फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ा, जिससे उत्पादन काफी कम हो गया। फल उत्पादक संगठनों का कहना है कि कई इलाकों में आधी से ज्यादा फसल खराब हो चुकी है।
शोपियां के एक चेरी किसान का कहना है कि अभी सिर्फ शुरुआती किस्मों की चेरी की तुड़ाई हो रही है। ऊंचाई वाले इलाकों में कई किस्में अभी पकनी बाकी हैं। अगर लगातार बारिश जारी रही तो फलों की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि चेरी बेहद नाजुक फल होती है और मौसम का थोड़ा सा बदलाव भी सीधे उत्पादन और गुणवत्ता पर असर डालता है।
उत्पादन घटने के बावजूद बाजार में चेरी की कीमतें अच्छी बनी हुई हैं। खासतौर पर इटैलियन और बुल्गारियन किस्मों की चेरी 200 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। फल व्यापारियों का कहना है कि मांग मजबूत रहने से किसानों को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि अगर मौसम लगातार खराब रहा तो आगे हालात और मुश्किल हो सकते हैं।
देश में कुल चेरी उत्पादन का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कश्मीर से आता है। घाटी में हर साल लगभग 12 हजार से 14 हजार मीट्रिक टन चेरी का उत्पादन होता है। कश्मीर अपनी पारंपरिक चेरी किस्मों जैसे मिश्री, मखमली और डबल चेरी के लिए जाना जाता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में किसान बदलते मौसम को देखते हुए कोर्डिया, रेजिना और स्टेला जैसी विदेशी किस्मों की खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।
पिछले साल पहली बार कश्मीर की प्रीमियम चेरी का निर्यात सऊदी अरब और यूएई के बाजारों में किया गया था। लुलु सुपरमार्केट जैसे बड़े विदेशी स्टोर्स में कश्मीरी चेरी की अच्छी मांग देखने को मिली। इससे घाटी के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का नया मौका मिला है।
चेरी की सबसे बड़ी समस्या इसकी कम शेल्फ लाइफ होती है लेकिन इस बार रेलवे की पार्सल ट्रेन सेवा राहत बनकर सामने आ रही है। रेलवे इस सीजन में 640 टन से ज्यादा चेरी मुंबई पहुंचाने की तैयारी में है। जम्मू डिवीजन ने इसके लिए 28 पार्सल वैन बुक की हैं, जिससे फलों की तेज और सुरक्षित ढुलाई संभव हो सकेगी।