
Natural Pesticide : खेती-किसानी और बागवानी में फसलों पर कीटों का हमला किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। इससे निपटने के लिए किसान खुलेआम महंगे रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं। ये केमिकल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को तो खत्म करते ही हैं साथ ही हमारी सेहत और जेब दोनों के लिए ठीक नहीं होते। ऐसे में आर्गेनिक खेती का रुख करना ही अच्छा है।
आप अपने घर पर ही बेहद असरदार जैविक कीटनाशक तैयार कर सकते हैं। जब फसलों पर खतरनाक कीड़ों और सुंडियों का तगड़ा अटैक हो जाए तो उस वक्त यह देसी घोल एक अचूक हथियार की तरह काम करता है। चलिए बताते हैं कैसे इसे घर पर ही बनाया जा सकता है।
कीटनाशक बनाने का आसान तरीकाइस असरदार जैविक कीटनाशक को घर पर तैयार करना बेहद आसान है और इसके लिए बाजार से कुछ भी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में लगभग दस लीटर देसी गाय का गोमूत्र लें। अब इसमें करीब तीन किलो नीम की हरी पत्तियों को अच्छी तरह पीसकर डाल दें।
इसके साथ ही आपको अपने आसपास मिलने वाले पौधों जैसे अमरूद, आम, पपीता या सीताफल में से किन्हीं दो पेड़ों की दो-दो किलो पत्तियां पीसकर इस गोमूत्र में मिक्स करनी होंगी। इस पूरे मिश्रण को धीमी आंच पर अच्छी तरह उबालें। जब इसमें दो-तीन बार उबाल आ जाए तो इसे उतारकर लगभग 48 घंटे के लिए ठंडी जगह पर रख दें। दो दिन बाद इस ठंडे घोल को सूती कपड़े से छान लें और आपका कीटनाशक तैयार है।
फसलों पर इस्तेमाल तैयार इस प्राकृतिक कीटनाशक को आप मिट्टी या प्लास्टिक के बर्तनों में भरकर आराम से छह महीने तक सुरक्षित स्टोर करके रख सकते हैं। जब भी आपकी खड़ी फसल पर रस चूसने वाले कीड़ों या छोटी इल्लियों का असर दिखाई दे तो इसका छिड़काव तुरंत शुरू कर दें। इसके इस्तेमाल के लिए एक एकड़ खेत हेतु लगभग तीन लीटर इस घोल को सौ लीटर साफ पानी में अच्छी तरह मिलाकर स्प्रे मशीन की मदद से पौधों पर छिड़कें।
मिलते हैं फायदेयह प्राकृतिक रसायन कीटों को अंडों से बाहर निकलने से रोकता है और उनके प्रजनन चक्र को पूरी तरह तोड़ देता है। विशेष बात यह है कि इसके इस्तेमाल से फसल को जहर मुक्त बनाया जा सकता है जिससे किसानों की लागत जीरो हो जाती है और पैदावार भी अच्छी मिलती है।