
Drip And Sprinkler Irrigation : खेती करने में पानी की कमी आज सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो चुकी है। ऐसे में पारंपरिक तरीके से सिंचाई करने पर पानी की बहुत ज्यादा बर्बादी होती है और इससे किसानों की लगत भी बढ़ती है। किसानों की इस समस्या को दूर करने और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना चला रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य हर बूंद पानी का सही इस्तेमाल करना और फसल की पैदावार को बढ़ाना है।
सबसे अच्छी बात यह है कि सरकार आधुनिक सिंचाई संयंत्र जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने के लिए किसानों को 70 से 75 फीसदी तक की भारी सब्सिडी दे रही है। इस सरकारी मदद से किसान बहुत ही कम खर्च में अपने खेतों में आधुनिक तकनीक अपनाकर पानी और पैसे दोनों की बड़ी बचत कर सकते हैं।
इस योजना के तहत किसानों को अपने खेतों में ड्रिप (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई) जैसी आधुनिक तकनीक लगाने के लिए सरकार की तरफ से तगड़ा वित्तीय सपोर्ट मिलता है। अलग-अलग राज्यों और किसानों की कैटेगरी के हिसाब से इस संयंत्र को लगाने की कुल लागत पर 70 से 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई किसान आधुनिक सिंचाई सिस्टम लगवाता है।
तो उसे अपनी जेब से सिर्फ 25 से 30 फीसदी पैसा ही खर्च करना पड़ता है बाकी का पूरा खर्च सरकार खुद उठाती है। इस सब्सिडी का सीधा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा मिल रहा है जो आर्थिक तंगी के चलते महंगे उपकरण नहीं खरीद पाते थे। इस छूट का फायदा उठाकर कोई भी पात्र किसान आसानी से अपने खेत में यह सिस्टम लगवा सकता है।
पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना को अपनाने से किसानों को एक नहीं बल्कि कई बेहतरीन फायदे मिलते हैं। पारंपरिक सिंचाई के मुकाबले ड्रिप या फव्वारा सिस्टम से खेती करने पर लगभग 40 से 50 प्रतिशत पानी की बचत होती है। जिससे सूखे या कम पानी वाले इलाकों में भी आसानी से बेहतरीन खेती की जा सकती है। इसके अलावा इस सिस्टम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है जिससे फसल को पूरा पोषण मिलता है और पैदावार में 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।
पानी के साथ-साथ इस तकनीक से खाद देने (फर्टिगेशन) पर लेबर का खर्च और बिजली का बिल भी आधा हो जाता है। कुल मिलाकर यह योजना किसानों की खेती की लागत को बहुत कम करके उनके मुनाफे को दोगुना करने का सबसे बेस्ट जरिया साबित हो रही है।