
Alphonso Mango Crisis : भारत में गर्मियों का मौसम आते ही आम की खुशबू और मिठास लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन इस बार महाराष्ट्र के मशहूर अल्फांसो आम यानी हापुस की फसल पर मौसम भारी मार पड़ी है। देश और विदेश में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले इस खास आम का उत्पादन इस साल बेहद कम हुआ है। लगातार बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और अल नीनो के असर ने अल्फांसो आम की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे किसानों की चिंता बहुत बढ़ गयी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के देवगढ़, मालवन और कोंकण क्षेत्र अपने अल्फांसो आम के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं लेकिन इस बार यहां के कई बागों में फसल लगभग खत्म हो गई है। किसानों का कहना है कि पेड़ों पर या तो आम बहुत कम लगे या फिर समय से पहले खराब हो गए।
तापमान में उतार-चढ़ाव बना बड़ी वजहकृषि अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर और जनवरी के दौरान दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखने को मिला। इसका असर आम के फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया पर पड़ा। इसके बाद अप्रैल और मई में सामान्य से ज्यादा गर्मी ने बची हुई फसल को भी नुकसान पहुंचा दिया।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अल नीनो की वजह से इस बार मौसम का पैटर्न काफी असामान्य रहा है। अल नीनो एक ऐसा मौसमीय प्रभाव है जो दुनियाभर में अत्यधिक गर्मी, सूखा और असामान्य मौसम की स्थिति पैदा कर सकता है।
85 से 90 प्रतिशत तक फसल नुकसानसरकारी वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों के एक सर्वे के अनुसार देवगढ़ इलाके में इस बार अल्फांसो आम की फसल को 85 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। कई किसानों के बागों में मुश्किल से कुछ प्रतिशत ही फल बच पाए हैं।
आम व्यापार पर भी पड़ा असरइस बार सिर्फ मौसम ही नहीं बल्कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर भी आम कारोबार पर दिखाई दे रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में शामिल है और हर साल बड़ी मात्रा में आम विदेशों में निर्यात करता है लेकिन ईरान युद्ध और खाड़ी देशों के आसपास बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग लागत काफी बढ़ गई है। आम निर्यातकों का कहना है कि माल ढुलाई का खर्च दोगुने से ज्यादा हो गया है। कई जगहों पर शिपमेंट में देरी और कैंसिलेशन की वजह से निर्यात करीब 40 प्रतिशत तक घट गया है, जो आम विदेश भेजे जाने थे, अब उन्हें स्थानीय बाजारों में बेचना पड़ रहा है।
हज़ारों लोगों की आजीविका प्रभावित महाराष्ट्र के कोंकण इलाके की अर्थव्यवस्था काफी हद तक आम और मछली कारोबार पर निर्भर करती है। ऐसे में आम की फसल खराब होने से सिर्फ किसानों ही नहीं बल्कि मजदूरों, पैकिंग कारोबारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी नुकसान हो रहा है।
मालवन में आम के डिब्बे बनाने वाले एक कारोबारी ने बताया कि इस साल उनके कारखाने में करीब एक लाख खाली डिब्बे बिना बिके पड़े हैं। उनका कहना है कि आम का सीजन यहां के लोगों की कमाई का सबसे बड़ा सहारा होता है।
भारत के आम बाजार पर भी असर
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। साल 2024-25 में देश में करीब 2.8 करोड़ टन आम उत्पादन हुआ था। पिछले साल भारत के आम बाजार की कीमत करीब 2.3 अरब डॉलर आंकी गई थी और आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन इस बार मौसम की मार ने किसानों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जलवायु परिवर्तन और असामान्य मौसम का असर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में आम उत्पादन पर और बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।