Climate Change Warning : वैज्ञानिकों की चेतावनी: आने वाले सालों में कई शहरों में बढ़ेंगी मौसम से जुड़ी आपदाएं

    27-May-2026
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Climate Change Warning : भारत में मौसम का संतुलन तेजी से बिगड़ता नज़र आ रहा है। कहीं अचानक मूसलाधार बारिश हो रही है, जिससे बाढ़ और जल संकट जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ता जा रहा है। तो वहीँ कुछ इलाकों में मानसून लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह जलवायु परिवर्तन का सीधा असर है जो आने वाले समय में देश के कई शहरों को बाढ़, जल संकट और सूखे जैसी गंभीर चुनौतियाँ पैदा कर सकता है।

हाल ही में आईआईटी हैदराबाद और यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के वैज्ञानिकों ने वर्ष 1901 से 2022 तक के बारिश के आंकड़ों का अध्ययन किया। ‘अर्बन क्लाइमेट’ जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च में भारत के 63 बड़े शहरों के मौसम पैटर्न का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पता चला कि पिछले 120 वर्षों में बारिश के स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम में सबसे बड़ा बदलाव 1950 से 1970 के बीच दर्ज किया गया था।

इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि एक ही क्षेत्र में मौजूद शहरों में भी बारिश का असर अलग-अलग तरीके से पड़ रहा है। कुछ शहरों में अचानक भारी बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि कई जगहों पर मानसूनी वर्षा लगातार घटती जा रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अब पुराने मौसम पैटर्न पर भरोसा करना मुश्किल होता जा रहा है।

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जिन शहरों में अचानक तेज बारिश बढ़ रही है, वहां शहरी बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। वहीं जिन इलाकों में बारिश कम हो रही है, वहां पानी की कमी और सूखे की स्थिति गंभीर हो सकती है। पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में मानसून कमजोर पड़ने के संकेत भी मिले हैं, जिसका असर जल उपलब्धता पर पड़ सकता है।

वैज्ञानिकों ने कहा है कि अब पूरे देश के लिए एक जैसी जलवायु नीति कारगर नहीं होगी। जिन शहरों में अत्यधिक बारिश हो रही है, वहां बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और बाढ़ नियंत्रण योजनाओं की जरूरत होगी। वहीं कम बारिश वाले इलाकों में जल संरक्षण और पानी बचाने की रणनीतियों पर अधिक ध्यान देना होगा। हर शहर की भौगोलिक स्थिति और जलवायु के हिसाब से अलग योजना तैयार करना जरूरी बताया गया है।

अध्ययन में पाया गया कि मौसम कई दशकों तक एक जैसा रह सकता है और फिर अचानक उसका व्यवहार बदल जाता है। ऐसे में केवल पुराने औसत आंकड़ों के आधार पर भविष्य की योजना बनाना जोखिम भरा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने माना कि मौसम अब तेजी से बदल रहा है और शहरों को नई परिस्थितियों के अनुसार तैयार रहना होगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, तेजी से बढ़ते शहर, कंक्रीट निर्माण और पेड़ों की कटाई ने स्थानीय मौसम पर गहरा असर डाला है। कई शहरों में तापमान बढ़ा है और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था कमजोर हुई है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर शहरी विकास योजनाओं में जलवायु परिवर्तन को शामिल नहीं किया गया, तो भविष्य में बाढ़ और जल संकट जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।