
Nautapa Crop Protection : नौतपा के दौरान पड़ने वाली भीषण गर्मी और लू हमारे किसानों और फसलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। तापमान के 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने पर खेतों में खड़ी फसलें तेजी से प्रभावित होने लगती हैं। ऐसे में जरा सी लापरवाही पूरी साल की मेहनत को सुखाकर बर्बाद कर सकती है।
इस एक्सट्रीम हीटवेव के दौर में जब मौसम बेहद गर्म हो जाता है। तब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ नए जमाने के और वैज्ञानिक उपायों को अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।
सिंचाई इस भयंकर गर्मी में फसलों को सबसे ज्यादा जरूरत सही समय पर सही मात्रा में पानी मिलने की होती है। दोपहर की तेज और सीधी धूप में खेतों में पानी देने की गलती भूलकर भी न करें, क्योंकि इससे पानी तुरंत भाप बनकर उड़ जाता है और फसलों की जड़ें भी गर्म होकर खराब हो सकती हैं। इसकी जगह सुबह जल्दी सूरज उगने से पहले या फिर शाम को सूरज ढलने के बाद ही हल्की सिंचाई करें, जिससे मिट्टी में लंबे समय तक नमी टिकी रहे।
मल्चिंग आज के इस आधुनिक दौर में ड्रिप इरिगेशन या स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे स्मार्ट तरीके सबसे बेस्ट माने जाते हैं, जो कम पानी में सीधे फसलों की जड़ों तक नमी पहुंचाते हैं। इसके अलावा पौधों के चारों तरफ सूखी घास या मल्चिंग की एक परत बिछा दें जिससे जमीन का पानी जल्दी नहीं सूखता और मिट्टी का तापमान भी बिल्कुल कंट्रोल में रहता है।
सुरक्षा का घेरा लगाएंतेज धूप की सीधी मार और लू के थपेड़ों से फसलों को बचाने के लिए खेतों के चारों तरफ हवा रोधक पेड़ों की कतारें या हरी जाली का घेरा बनाना एक बेहद आधुनिक और कारगर उपाय है। यह सुरक्षा कवच गर्म हवाओं की रफ्तार को काफी हद तक कम कर देता है, जिससे फसलों को सीधी लू की मार नहीं झेलनी पड़ती।
सही न्यूट्रिशननौतपा की इस भीषण हीटवेव के दौरान खेतों में भारी रासायनिक खादों या यूरिया का इस्तेमाल करने से पूरी तरह बचना चाहिए। क्योंकि ये मिट्टी में और ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं। इसकी जगह फसलों को अंदर से मजबूत बनाने के लिए पोटैशियम या ऑर्गेनिक कंपोस्ट जैसे आधुनिक पोषक तत्वों का हल्का छिड़काव करना चाहिए। यह न्यूट्रिशन फसलों की इम्युनिटी को बूस्ट करता है जिससे उनमें गर्मी और सूखे की इस गंभीर स्थिति को झेलने की ताकत कई गुना बढ़ जाती है।